हमें संगति अच्छी करनी चाहिए आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
डोंगरगढ़
चंद्रगिरी तीर्थ पर विराजित आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए संगति अच्छी रखने की सीख देते हुए एक उदाहरण देते हुए कहा कि मैं आपके सामने एक दृश्य को रख रहा हूं जिसे आप समझ कर अपने जीवन में अपने आचरण में लाने का प्रयास करें। किसान के लिए बोलते हुए उन्होंने कहा कि किसान बहुत समझदार होते है, जो मौसम एवं ऋतु के अनुसार अनाज,फल व खेती करते हैं। गर्मी के मौसम में आम तरबूज एवं खरबूजा आदि फल बाजार में उपलब्ध होते हैं जिसे गर्मी में सेवन किया जाता है। पूज्यश्री ने कहा कि जब खरबूजा पकने लगता है तो उसकी खुशबू चारों तरफ अपने आप फैलने लगती है और आसपास रखें खरबूजे भी उससे प्रभावित होकर पकने लगते हैं।
पूज्य गुरुदेव ने कहा कि इसी प्रकार हमें भी अपनी संगति अच्छी रखनी चाहिए। हमारे आचार्यों ने इतने ग्रंथ लिखे हैं जिसे पढ़कर हमें उसका चिंतन मनन कर अपने आचरण में लाना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि हमें आर्यों की संगति करना चाहिए जो कि गुणों को ग्रहण करने में अग्रणी होते हैं। यदि आपको आर्यों के बारे में जानना है तो इतिहास उठाकर पढ़ो की आर्य कौन थे। और कुछ समय भारत का विस्तार कहां तक था।
आयुर्वेद 2000वर्ष से भी ज्यादा पहले का है
पूज्यश्री ने कहा कि आज बोध और शोध के लिए लोग विदेश जाते हैं। एलोपैथी का अविष्कार लगभग 200 वर्ष पहले हुआ है जोकि एक विदेश पद्धति है जबकि आयुर्वेद 2000 वर्ष से भी ज्यादा पहले का है और इसका आविष्कार भारत में ही हुआ है अन्य कहीं नहीं। विदेशी लोग अपने प्रोडक्ट को लैमिनेट आदि पैकिंग कर बेचते हैं, जबकि आपके प्रोडक्ट गुण, मात्रा आदि की गुणवत्ता अच्छी होगी तो उसे खरीदने वाले बहुत मिलेंगे। उन्होंने कहा कि समृद्ध होना है तो गुणों की वृद्धि करो। आज किसान को अपनी फसल बेचने के लिए बाजार में जाना पड़ता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
