अभिनंदनोदय अतिशय क्षेत्र का पंचकल्याणक अपने आप में एक शाही पंचकल्याणक
ललितपुर
यह शाही पंचकल्याणक इसीलिए कहा जाएगा यहा जो हुआ वह अब तक कही देखने को नही आया जैसे निर्यापक श्रमण जगतज्येष्ठ मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महामुनिराज का ससंघ मंगल सानिध्य होना जो अपने आप में अदभुत है, विश्व के इतिहास में ऐसा बार 500 किलो की चांदी की अद्वितीय प्रतिमा विराजमान हुई।
अगर हम और गोर करे तो कही नवीन इतिहास बन जिनमे विश्व पटल पर लहराती 200 फीट से भी ऊंची जैन ध्वजा। (जिसे ललितपुर नगर के किसी भी स्थान से स्पष्ट देखा जा सकता है), इसके साथ विश्व का सबसे बड़ा 10 मंजिला पूर्ण निर्मित प्रतिष्ठित सहस्रकूट, सम्पूर्ण भू पटल पर अपनी गंभीर गूँज छोड़ता 7000 किलो बजनी घंटा, जो अलग ही उर्जा देता है। इस पंचकल्याणक में ऐसा पहली बार हुआ की विश्व इतिहास में प्रथम बार 5000 से भी अधिक इंद्र – इंद्राणी जोड़े एक साथ सम्मिलित हुए इतना ही नही लगभग 12000 से अधिक लोग इंद्र – इंद्राणी बनकर पूजा करते हुए नजर आए।


इस आयोजन पर जितना लिखा जाएगा शब्दो की सीमा असीमित सी हो जाती है, प्रतिदिन 3000 से अधिक सुंदर अष्ट द्रव्य से सुशोभित अत्यंत आह्लादकारी पूजन थालियां जो अपने आप में अभूतपूर्व है,800 फीट लंबाई को प्राप्त पांडाल, वही 15 फीट आकार वाले बृहत अतिशयकारी चंवर शोभावान कर रहे थे।

वही विश्व का सबसे विशाल पाँच मंजिला कल्पवृक्ष गुफा मंदिर जिसको जिसने भी देखा, उसे दूसरी दुनिया का एहसास करा रहा था,एक साथ 2000 से भी अधिक प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा होना इस आयोजन भव्यता को दर्शाता है।

आदि आदि अनेक ऐसे कारण है जो इस पंचकल्याणक को शाही बनाते है ।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए तो इस पंचकल्याणक के बारे में यह कहा जा सकता है कि न भूतो न भविष्यति
– अमन जैन शास्त्री “मुंगावली से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
