मनुष्य जीवन को ईमानदारी से जब तक नहीं जिओगे तब तक जन्म मृत्यु चलते रहेंगे प्रसन्न सागर महाराज
आंखों की रोशनी चली गई थी गुरुदेव ने लौटाई
पारसनाथ
पूज्य गुरुदेव प्रसन्न सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य जीवन को जब तक ईमानदारी से नहीं जिओगे तब तक जन्म मृत्यु चलते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आदमी को प्राप्ति में तृप्ति नहीं है, उसकी लालसा खत्म नहीं हो रही है। इसीलिए कहता हूं कि प्राप्ति में संतोष नहीं है, तृप्ति में संतोष सुख है।महाराज श्री ने कहा कि ये पांडाल, ये डेकोरेशन, ये चकाचौंध से मुझे कोई मतलब नहीं है मैंने यह साधना अपने आपको निहारने के लिए की है। जीवन में मैंने सब पा लिया अब कुछ खाने को नहीं है।उन्होंने आगे कहा कि अब जीवन बस इन 4 चीजों से चलेगा साधना, स्वाध्याय, संत और समाधि।
पूज्य आचार्य श्री ने सभी के समक्ष एक जानकारी साझा करते हुए कहा कि मेरी आंखों की रोशनी चली गई थी, तब गुरुवर आचार्य विराग सागर श्री ने अपनी साधना से उनकी आंखों की रोशनी प्रदान की।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
