गुरुदेव की दीक्षा हमारे कल्याण का कारण बनी प्रज्ञासागर महाराज आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज का दीक्षा दिवस और मन्दिर का शिलान्यास समारोह आनंद से सम्पन्न हुआ….

धर्म

गुरुदेव की दीक्षा हमारे कल्याण का कारण बनी प्रज्ञासागर महाराज आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज का दीक्षा दिवस और मन्दिर का शिलान्यास समारोह आनंद से सम्पन्न हुआ….

पुष्पगिरी
दीक्षा कब ली यह महत्वपूर्ण नहीं है, दीक्षा क्यों ली यह महत्वपूर्ण है।दीक्षा लेने वाला साधक आत्मकल्याण को प्रमुखता देता है।जो इसके इसके विपरीत सिर्फ जनकल्याण में लगा रहता है वह अपनी साधना से च्युत हो जाता है। उक्त विचार प्रज्ञासागर महाराज ने अपने गुरुदेव आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के 43वें दीक्षा दिवस पर उपस्थित जनसमूह के समक्ष व्यक्त किये। उन्होंने कहा गुरुदेव की दीक्षा हमारे कल्याण का कारण बनी।यदि गुरुदेव दीक्षा नहीं लेते तो शायद आज हम संसार के जंजालों में उलझें होते।अतः इनकी दीक्षा हमारे लिए फायदेमंद रही।

 

 

 

इस अवसर पर भिंड से आये हुए गुरुभक्तों द्वारा आचार्य श्री विमलसागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया ।संघस्थ साधुओं ने पादप्रक्षालन किया। उपस्थित मातृ शक्ति ने अर्घावतरण किया। पुरुषों ने शास्त्र विराजमान किये। इसके बाद शु विनयांजलि का क्रम शुरू हुआ। सर्वप्रथम विनयांजलि श्रीमती शोभा कासलीवाल, उसके बाद रविसेनजैन भिंड और शंकरलाल भिंड ने विनयांजलि दी। इसी क्रम में ब्रम्हचारी संस्कार भैया, प्रवीण भैया,एकल भया, प्रियतीर्थ भया,आर्यिका श्री पवित्रमती माता जी ने अपने श्रद्धा सुमन गुरु चरणों मे समर्पित किये।

आयोजन के क्रम में प्रज्ञासागर महाराज ने गुरुदेव के हाथों में नवीन पिच्छी भेंट की।पुरानी पिच्छी लेने का सौभाग्य सोनकच्छ निवासी श्री नरेन्द्र पाटोदी को प्राप्त हुआ।इस अवसर पर पूरे पाटोदी परिवार ने आकर आशीर्वाद प्राप्त किया।अंत में गुरुदेव ने अपना आशीर्वाद देकर कार्यक्रम के आनंद को अनन्त गुणित कर दिया।कार्यक्रम का कुशल संचालन क्षुल्लक श्री पर्वसागर महाराज ने किया।

 

कार्यक्रम के बाद मन्दिर के शिलान्यास हेतु समस्त संघ मन्दिर निर्माण स्थल पर आया जहा पर भूमिपूजन, गर्भ शोधन की विधि की गई।शिलान्यास गर्भ धारण की क्रिया है।शिलान्यास के साथ पुष्पगिरी की इस भूमि ने मन्दिर को जन्म देने हेतु गर्भ धारण किया। शिलान्यास करने का सौभाग्य सोनकच्छ निवासी श्री सनत-त्रिशला छाबड़ा परिवार को मिला।इस अवसर पर मुख्य शिला विराजमान करने का लाभ श्री सनत छाबड़ा,श्री गुलाबचंद, ललिल कुमार पाटोदी, श्री नरेन्द्र कुमार नीलेश कुमार पाटोदी, ब्र.संस्कार भैया,श्री विमल जी मंजुला जी जैन उज्जैन को प्राप्त हुआ।तो इनके साथ स्वर्ण शिला,रजत शिला,ताम्र शिला,नवरत्न,चांदी के सिक्के,चांदी के स्वस्तिक,ताम्र शलाखें,पारद स्थापन आदि की प्रक्रिया का लाभ उपस्थित भक्तों ने प्राप्त किया।

इस अवसर पर सर्व प्रथम मातृका यंत्र की स्थापना आचार्य गुरुदेव पुष्पदंत सागर महाराज के करकमलों से हुई।और शिलान्यास समारोह सम्पन्न हुआ।

पूज्य आचार्य प्रज्ञासागर महाराज ने किया मंगल विहार आचार्य श्री अपने शिष्य 3 किलोमीटर तक छोड़ने गए

 

तीन बजे मैं संघ सहित आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने मंगल विहार किया। मंगल विहार से पूर्व उन्होंने पूज्य गुरुदेव के दर्शन करके आज्ञा ली। मंगल विहार के चरणों में एक अभूतपूर्व उदाहरण देखने को मिला। जब स्वयं गुरुदेव पुष्पदंत सागर महाराज अपने शिष्य को छोड़ने 3 किलोमीटर तक पैदल चले। फिर आशीर्वाद देकर वे वापस चले गए। सचमुच इतना प्रेम, इतना अपनापन गुरु का शिष्यों के प्रति।
प्रज्ञा सागर महाराज विहार करते हुए सोनकच्छ पहुंचे।भगवान के दर्शन किये।।आगे चलकर सेठी फार्म हाउस में रात्रि विश्राम हुआ।

पूज्य महाराज श्री का बुधवार सुबह सेठी फार्म हाउस से मंगल विहार होगा व आहारचर्या मेहतवाड़ा में ही होगी।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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