कभी भी किसी भी परिस्थिति में खोटे विचार नही करना चाहिए आचार्य कनकनंदी

धर्म

कभी भी किसी भी परिस्थिति में खोटे विचार नही करना चाहिए आचार्य कनकनंदी
भीलूडा
अध्यात्मा योगी वैज्ञानिक धर्माचार्य कनकनंदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया की अवचेतन मन में कुसंस्कार होने के कारण मन की चंचलता खोटे विचार अधिक रहते हैं। डिप्रेशन के कारण पुस्तक लिखना आदि अच्छे कार्य नहीं कर पाते हैं नेगेटिव विचार , कहा-सुनी, झगड़ा आदि विचार बार-बार आते हैं अतः स्वप्न में भी बोलते हैं परस्पर लड़ते हैं गाली देते हैं। सोचकर नहीं बोलते हैं जो इनपुट होता है वही आउटपुट होता हैं।

उन्होंने उदाहरण के माध्यम से बताया जिस प्रकार नमक एक साथ अधिक नहीं खा सकते, वैसे ही धर्म का विषय भी थोड़ा-थोड़ा ही समझ में आता है। अवचेतन मन मैं अंतरंग में उतर कर के संयम तप, ध्यान सहिष्णुता आदि रखना चाहिए।

 

 

अपध्यान मानसिक रूप से अवचेतन मन में होता है,पूर्व कृत भाव, अज्ञात भाव से सब पाप कर्म के कारण बुरे विचार ही आते हैं।मनरुपी चंचल बंदर शराब पिलाने की तरह, बिच्छू काटने की तरह है मन चंचल रहता है। मन में स्थिरता नहीं होती है। मन में ईर्ष्या द्वेष घृणा भरा हुआ होने के कारण बार-बार वही बाहर आता है जिसे दु श्रुति कहते हैं। आत्मा को पवित्र करने के विपरीत जो भी कथन है वह दुष्ट कथन अनर्थ दंड अप ध्यान है। इनको सुनना सुनाना सोचना कहना अनुमोदना करना शिक्षण अर्जुन करना सब पाप है। क्रोध मान माया लोभ आदि जिस से उत्पन्न होते हैं वह अनर्थ दंड है, पाप है। कभी भी किसी भी परिस्थिति में खोटे भाव नहीं करना चाहिए दुष्ट कथा दुष्टभाव से कभी सोचना कहना बोलना नहीं चाहिए। आचार्य
विजयलक्ष्मी जैन से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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