जिसने इस क्रोध पर नियंत्रण पा लिया उसने स्वर्ग को प्राप्त कर लिया जैसा है पुलक सागर महाराज
डूंगरपुर
इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन उसका क्रोध है और जिसने इस क्रोध पर नियंत्रण कर लिया उसने स्वर्ग को प्राप्त कर लिया जैसा है।
यह बात भारत गौरव एवं राष्ट्रीय संत आचार्य श्री 108 पुलक सागर जी महाराज ने तीसरे दिन ज्ञान गंगा महोत्सव में श्रावक श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कही। आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में समर्पण का भाव होना चाहिए सभी के प्रति दया का भाव रखो। आज के रिश्तों को खत्म करने का काम केवल क्रोध कर रहा है। क्रोध का घर, परिवार समाज और जीवन को स्थान नहीं होना चाहिए, यह जीवन हमें प्रेम और करुणा से जीने के लिए मिला है। क्षण भर का क्रोध पूरे जीवन और रिश्तो को बर्बाद कर देता है। छोटी छोटी सी बातों से आजकल क्रोध आने लग गया है एक पल में रिश्ते समाप्त हो रहे हैं ।
आचार्य श्री ने कहा कि जब भी रिश्तों में बंधों तो एक प्रण जरूर ले लेना और कहना कि मैं आग़ बन जाऊं तो यूं पानी बन जाना इससे जीवन में कभी क्रोध नहीं आएगा और ना ही रिश्ते खत्म होंगे पल भर के क्रोध में आज सालों पुराने रिश्ते खत्म हो रहे हैं।

रिश्तो में जितना समर्पण होगा रिश्ते उतने ही मधुर बन जाएंगे।




व्यर्थ में तर्क करना छोड़ दो क्योंकि जहां तर्क है वहां नर्क है जहां समर्पण है वहां स्वर्ग है। समर्पण की शुरुआत अपने घर से करो। अपने बच्चों को समर्पण के भाव सिखाओ। क्रोध को आज इसी वक्त छोड़ कर जाओ क्योंकि मैं यहां मंदिर की प्रतिष्ठा करने नहीं आया हूं, मैं तो यहां परिवार की प्रतिष्ठा करने आया हूं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
