जिनालय का निर्माण भव्य करा सकता है आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर जी महामुनिराज

धर्म

जिनालय का निर्माण भव्य करा सकता है आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर जी महामुनिराज
पुष्पगिरी
पावन पुनीत तीर्थ पुष्पगिरी पर आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर महाराज के सानिध्य एवं आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर जी महामुनिराज ससंघ के सानिध्य में भगवान आदिनाथ की मूर्ति के मंदिर का भूमि पूजन रविवार को संपन्न हुआ। आज से लगभग 17 वर्ष पूर्व पूज्य आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर जी महामुनिराज ने यह प्रतिमा पर्वत पर विराजमान करवाई थी। अब इसका भूमि पूजन विधि विधान के साथ रविवार की बेला में संपन्न हो गया। भूमिपूजन कर्ता श्री मनोज जी शारदा जी ने किया।

इस मांगलिक बेला में आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर जी जैन ने उद्बोधन में कहा की जिनालय का निर्माण भव्य जीव करा सकता है। जिनालय का निर्माण सम्यक दर्शन के बाह कारणों में आता है। उन्होंने कहा जहां भी मंदिर बन रहे हो सहयोग करें ना करें लेकिन उनके कार्य की अनुमोदना करें। आगे बोलते हुए कहा कि जहां मंदिर जिनालय हुआ करते हैं वहां परिणामों में निर्मलता एवम सेवा का भाव अपने आप आ जाता है। जो पैसा जहा जाना होता है वो वही जाता है। जो पैसा मंदिर में लगना है वो मंदिर में ही लगेगा। दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम पैसे पैसे पे लिखा है पाने वाले का नाम हम संसार बढ़ाने का काम तो करते है इसको हटाने का काम भी जरूरी है।इसको हटाने के लिए धर्म की वृद्धि भी जरुरी है। पाप बढ़े तो धर्म भी बढ़ना चाहिए। उन्होंने पुष्पगिरी तीर्थ के लिए कहा पुष्पगिरी मानव सेवा केंद्र के नाम से जाना जाता है।उन्होंने कहा यहां से संकल्प लेकर जाए की मैं जीवन में एक जिनालय का निर्माण व मूर्ति विराजमान जरूर करूंगा।

 

 

 

इस अवसर आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर महाराज ने कहा आने वाली पीढ़ी अगर मंदिर नहीं होंगे तो भटक जाएगी

और संस्कार खत्म हो जाएंगे यह वह पावन तीर्थ है जहां परम अहिंसा, प्रेम, जियो और जीने दो की चर्चा होती है। मैं आनंदित हूं कि आप सभी सम्मिलित हुए। जो यहां आया है वह अपने लेकर जाएगा और यहां जो सभी आए हैं वह सभी पुण्यात्मा है और अपना पुण्य बढ़ाएगे। उन्होंने पुष्पगिरी के निर्माण में सोनकच्छ का बड़ा योगदान बताया।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *