मित्रता ऐसी करें जो सुख देवे ,धर्म ही ऐसा मित्र है जो सुख देता है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
मदनगंज किशनगढ़
संसार के सब प्राणी, सुख की कामना सभी करते हैं ,धर्म ऐसा मित्र हैं जिससे सुख प्राप्त होता है। सुख नश्वर होता है इससे आत्मीय सुख की प्राप्ति होती है
यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने
वर्धमान सभागार में प्रकट किए
गौरव पाटनी प्रचार संयोजक एवम् राजेश पंचोलिया ने बताया
आचार्य श्री ने आगे उद्बोधन में कहा कि सभी सुख की कामना करते हैं सुख केवल मनुष्य भव में प्राप्त होता है और ऐसा सुख प्राप्त होता है जो नाश नहीं होता है मनुष्य भव प्राप्त करने के साथ हमे तीर्थंकर प्रभु की शरण प्राप्त होती है। जिन धर्म जिनेंद्र देव की शरण में आने से हमें सुख, हित और आनंद मिलता है तीर्थंकर प्रभु ने भी मनुष्य पर्याय को प्राप्त करके सिद्ध पद को प्राप्त किया है इसलिए जिन धर्म और जिन शासन हितकारी हैं सुख देने वाले हैं पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में पाषाण और धातु की प्रतिमा में जिनत्व की स्थापना की जाती है इसलिए सभी को अपनी शक्ति और सामर्थ्य अनुसार परिणामों को निर्मल बनाकर पंचकल्याणक से यह संदेश प्राप्त करना चाहिए भावनाओं से सिद्धपद की प्राप्ति होती है पंचकल्याणक में छोटे से नियम त्याग तप का धर्म रूपी छोटा बीज विशाल वृक्ष बनता है


पंचकल्याणक मनोरंजन के साधन नहीं है ,इससे हमें मन की स्थिरता को प्राप्त कर जिन धर्म और उसके नियम को समझना चाहिए मित्रता आपको ऐसे करना चाहिए जो आपको दुख नहीं सुख देवे ।और धर्म ही ऐसा मित्र है जो सुख देता है धर्म रूपी अनुष्ठान में धर्म को समझकर सुखी बनने का प्रयास करें आप सब को मंगल आशीर्वाद।
आचार्य श्री की मंगल देशना के पूर्व संघस्थ शिष्य मुनि श्री हितेंद्र सागर जी का उपदेश हुआ।
मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने प्रवचन ने बताया कि कल्याणक का अर्थ देवों द्वारा विशेष पूजा करना जो आत्मा तीर्थंकर पद को प्राप्त करने वाली है उनके तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का यह महत्व है कि देवों द्वारा पूजा जाना संसारी आत्माओं से प्रथकता को दर्शाती है जो आत्माएं तीर्थंकर होती है वह वर्तमान भव से 3 भव पूर्व केवली श्रुत केवली के शरण में 16 कारण भावनाओं को भाकर 148 कर्म प्रकृति में तीर्थंकर प्रकृति का आश्रव करते हैं।
इसके पूर्व प्रातः श्री मुनिसुब्रत नाथ जिन मंदिर में नांदी विधान की पूजन सोधर्म इंद्र सहित सभी इंद्र परिवार द्वारा की गई।
इसके बाद एक वेशभूषा में महिलाओं का अनुशासित दल सिर पर मंगल कलश लेकर चल रहा था। विशाल जलूस मार्ग पर सभी धर्मो के नागरिकों ने स्वागत द्वार लगाए। जगह जगह पुष्प वृष्टि की जा रही थी कलश यात्रा के पीछे पंच कल्याणक में पात्र माता पिता,सोधर्म इंद्र,चक्रवती राजा,कुबेर, ईशान, सानत, माहेंद, ब्रह्म, ब्रहोत्तर, लांतव ,शुक्र, महाशुक्र, शतार आदि हाथी तथा बग्गी में सवार होकर चल रहे थे।जुलूस का समापन वर्धमान सभागार में हुआ
ध्वजारोहण मंच पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित चतुर्विद संघ को आर्मी दल द्वारा मार्च पास्ट कर नमन किया गया।इस आकर्षक प्रदर्शन प्रस्तुति के बाद
संजय पुनीत पापड़ी वाल परिवार किशनगढ़ द्वारा मंत्रोचार के बाद धवजारोहण किया गया।



मुख्य कार्यक्रम स्थल वर्धमान सभागार में आचार्य श्री संघ सहित विराजित हुए। प्रथमाचार्या चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी के चित्र का अनावरण एवम् दीप प्रवज्जलन भागीरथ चौधरी आर के परिवार,दिनेश सिंह राठौड़ ,विनोद पाटनी सुभाष बड़जात्या ,संजय पापड़ी वाल द्वारा किया गया।

श्री चंद्र प्रभु महिला मंडल द्वारा मनमोहक नृत्य के माध्यम से मंगलाचरण प्रस्तुत किया। 5 प्रतिमाधारी श्रीमती सुशीला पाटनी द्वारा सुंदर भजन का गायन किया
दोपहर को सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा, अंकुरारोपण, तथा जिनाभिषेषक किया गया। सभी इंद्र परिवार द्वारा याग मंडल की पूजन की गई। शाम को आरती तथा शास्त्र सभा हुई। रात्रि को गर्भ कल्याणक के नाटकीय उत्सव किया गया
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
