है महाव्रती धारी साधु साध्वी भगवन्त
*जरा सी ठंड हम काँपने है लगते,,*
*स्वेटर शॉल मोजा टोपा क्या क्या नही पहनते,,*
*आप सब कुछ है समभाव से सहते..*
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*कोरोना के कहर त्रस्त है दुनिया सारी,*
*डर है मन मे कि कहि हमे न लग जाये ये बिमारी,*
*लेकिन इन सब के बीच भी,*
*आपकी साधना अविराम गति मान है..*
*है साधु-साध्वी भगवंत धन्य धन्य ये जिनेश्वर मार्ग है…
. धन्य है आप, धन्य है आपकी प्रभु भक्ति धन्य है प्रतिज्ञा, साधन छोड़ साध्य हो जाने की..*
*धन्य है प्रतिज्ञा, आराधना से आराध्य हो जाने की..*
.णमो लोए सव्वसाहूणम
अजित पारख रामगंजमडी
