अन्तर्मना उवाच* (28 जुलाई!)

धर्म

*अन्तर्मना उवाच* (28 जुलाई!)

*दान करने से रूपया जाता है पुण्य नहीं,*
*घड़ी बन्द करने से, घड़ी बन्द होती है समय नहीं,*
*झूठ छुपाने से झूठ छुपता है – सच नहीं,*
*क्रोध की गाँठ बुरी है, क्रोध नहीं..*
*इसलिए क्रोध नरक है और क्षमा स्वर्ग-मोक्ष..!*

 

 

 

कोई भी नरक जाना नहीं चाहता, सबकी एक ही कोशिश होती है कि वह मरने के बाद स्वर्ग जाये। *भारत में मरने वाले प्रत्येक व्यक्ति को स्वर्ग तो गोड गिप्ट में मिलता है।* जैसे – भारत में मरने वाले प्रत्येक भारतीय व्यक्ति के नाम के आगे स्वर्गीय ही लिखा जाता है। *आज तक आपने कभी नहीं पढ़ा होगा कि नरकीय फलाने चन्द जी।*

*

नरक ना जाने के सात उपाय है* – (1) जुआ नहीं खेलना (2) चोरी नहीं करना (3) मांस का सेवन नहीं करना (4) मदिरा का पान नहीं करना (5) वेश्यालय जाने से बचना (6) अपनी पत्नी के अलावा अन्य माता बहिनों से अनैतिक सम्बन्ध नहीं रखना (7) किसी भी जीव का बध नहीं करना।

 

 

ये सात मार्ग ही स्वर्ग और मोक्ष के द्वार खोलते हैं। *हम सोचते हैं कि स्वर्ग आसमान में और नरक नीचे पाताल में है। लेकिन स्वर्ग नरक तो इसी लोक में ही विद्यमान है।* हमारी अच्छी बुरी आदतें, या हरकतें स्वर्ग नरक का बोध करा देती है। यह इन्सान के हाथ में है कि वह कैसी ज़िन्दगी जीना चाहता है -?

 

 

_*यह भी सत्य है कि हर एक इन्सान जानने की कोशिश करता है कि स्वर्ग-नरक कहाँ है -? और वहाँ क्या क्या होता है-?*_

अरे बाबू ! *जहाँ जाना ही नहीं है, फिर वहाँ के बाबत कुछ भी सोचना यानि वक्त की बर्बादी ही समझना…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *