सम्मेदशिखर जी-आज स्वर्णभद्र कूट पर आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का 57 वॉ आहार निरन्तरराय हुवा

धर्म

*सम्मेदशिखर जी-आज स्वर्णभद्र कूट पर आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का 57 वॉ आहार निरन्तरराय हुवा

शिखर जी-इस समय पूरे झारखंड में सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान शीत लहरी की ठंड में जैन धर्म सबसे अधिक तपस्वी इस चतुर्थ काल के मुनि की तरह तपस्या करने वाले जैन मुनि सिंहनिस्क्रीय ब्रत धारी आचार्य श्री 108 अन्तर्मना प्रसन्न सागर जी महाराज सम्मेद शिखर के स्वर्णभद्र कूट पर 5डिग्री की ठंडी में अपनी तपस्या में रत होते हुवे आज सभी आदिवासी के हज़ारों लोगो को मंगल आशीर्वाद देते हुवे मौन वाणी से कहा कि

 

 

 

सभी मधुबन वासी, मूल निवासी, आदिवासी समाज को नववर्ष एवं मकर संक्रान्ति की अनन्त शुभसंशाओ के साथ ~ आशीर्वाद स्वस्थ प्रसन्न रहो ++
* नववर्ष एवं मकर संक्रान्ति का महान पर्व हम इस सोच और संकल्प के साथ शुरू करें कि बीते हुये दिनों की बुराईयों को, आपस में हुये वाद बिवाद को, एक दूसरे की गलतियों को नहीं दुहरायेंगे और आपस में प्रेम सदभाव मैत्री, भाई चारे की तरह साथ निभायेंगे। नववर्ष, मकर संक्रान्ति को नई सोच, नई उमंग और नये जोश के साथ बीतायेंगे।
मैं मानता हूं कि संकल्प के पथ पर चलना कठिन काम है लेकिन असम्भव नहीं।
* जो लोग हिम्मत करते हैं वे पारसनाथ भगवान के चरणों में पहुंच जाते हैं और जो हिम्मत हार जाते हैं वे सीता नाला से वापस लौट आते हैं। ● आप सभी अति सौभाग्य शाली हैं कि आप सबको तीर्थराज सम्मेद शिखर पर्वत की वरदानी छांव में जीवन जीने का अवसर मिल रहा है। इसलिए आप सभी भव्य जीव हैं।
• आप लोगों ने जो तीर्थ यात्रियों के मन में अपने कार्य और कर्त्तव्य के प्रति, सेवा समर्पण का जो
विश्वास जगाया है वह प्रशन्सनीय और अनुकरणीय है। ● कोई भी जैन यात्री एवं हमारी माता बहिने आपके साथ, अर्ध रात्रि को अकेले, पूरे पर्वत की निडरता के साथ, निःसंकोच होकर वन्दना कर आती है, यह पारसनाथ भगवान और आपके अखण्ड विश्वास का ही फल है। अन्यथा ओ माई गोड
• पूरे मधुबन में कोई भी मजदूर हो, डोली वाले या बाईक वाले हो, चाहे पर्वत के कर्मचारी या गार्ड हो, किसी ने भी आज तक किसी भी यात्री से गन्दी हरकते नहीं की, ना गन्दा व्यवहार किया। इसी
विश्वास के कारण ही हमारी माता बहिने आपके साथ पर्वत पर आने को तैयार हो जाती हैं। आप अपनों से आत्मीय अपनत्व विश्वास के साथ एक निवेदन करना चाहता हूँ –
• पर्वत की पवित्रता और स्वच्छता का ध्यान रखेंगे।
• पर्वत पर कोई भी मादक पदार्थ ना खायेंगे, ना किसी को खाने देंगे। यदि कोई व्यक्ति या यात्री गलत पदार्थ खा पी रहा हो तो उसे प्रेम से समझायेंगे।
आपने हमारे विचारों को प्रेम पूर्वक सुना बहुत बहुत धन्यावाद आशीर्वाद के साथ।
आप साथ दो हमारा जीना हम सिखायेंगे। मंज़िल तुम पाओ रास्ता हम बनायेंगे। तुम सदा स्वस्थ प्रसन्न रहो – खुशियां हम दिलायेंगे। तुम भक्त बने रहो – हम तुम्हें भगवान बनायेंगे। * आपकी हनुमान सी भक्ति, लक्ष्मण सा समर्पण, मीरा सा प्रेम ही संसार सागर से पार लगायेगा, दुखों से बचायेगा।
* आप सभी सुखी सम्पन्न, एश्वर्यवान हो, सभी को बहुत बहुत आशीर्वाद।

++ पारसनाथ स्वर्ण भद्र कूट से 14 जनवरी अतर्माता आचार्य श्री
९०८ प्रसन्ननुसार जी महाराज
संकलन कर्ता मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा कोडरमा

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