पूज्य वात्सल्य वारिधि वर्धमान सागर महाराज की साधना और तपस्या का प्रभाव
संस्मरण
यह संस्मरण तब का है जब पूज्य गुरुदेव संघ सहित गिरनार तीर्थ की यात्रा करने हेतु आगे बढ़ रहा था। उस समय गुरुवर की समस्त व्यवस्थाओं को चंदू काका देखा करते थे। उस दिन के आहार के बाद अगले दिन का आहार किसी बगीचे में होना था। उस समय संघ में करीब 100 लोग थे।
इतने बड़े संघ को देखकर वहां के माली ने कहा कि इतना पानी हमारे कुएं में नहीं है। लेकिन चंदू काका ने विनम्र भाव से माली से कहा कि भैया हम आपके कुए का पानी सिर्फ साधुओ के आहार के लिए काम में लेगे। इतनी बात बताने पर माली ने वहा रुकने दिया।
होना क्या था संघ सहित आचार्य श्री का प्रवेश बगीचे में हुआ और भक्ति सामायिक आदि सभी क्रियाएं वहां संपन्नता की ओर बढ़ने लगी। उस कुएं में कम पानी होने की बात माली कर रहा था माली देखकर खुद स्तब्ध रह गया कि रातों-रात कुए मैं पानी इतना आया कि सुबह पूरे संघ का आहार वहीं संपन्न हुआ। और पहले से करीब एक हाथ पानी कुएं में बढ़ गया। तब बगीचे का माली बोलने लगा। महाराज मुझे क्षमा कर दो, मैंने संघ को ज्यादा पानी लेने से मना किया था। आप तो दो तीन दिन और रुक जाओ यही होता है संत की साधना और तपस्या का प्रभाव और परिणाम।
राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
