आर्यिका 105 विशाखा श्री माताजी सिंहनिष्क्रिडित जैसा महा व्रत कर,कर्मो की निर्जरा कर रही है।
सम्मेदशिखर
परम पूज्य गणाचार्य श्री 108विरागसागर महाराज की परम तपस्वनी श्रमणी आर्यिका रत्न 105 विशाखा श्री माताजी ,जो स्त्री पर्याय में होते हुए भी, सवसे बड़ा जघन्य सिंह निष्क्रिडित जैसा महा व्रत कर,कर्मो की निर्जरा कर रहीं हैं,ऐसीं गुरु माँ के तप,साधना कर रही है।आर्यिका माताजी सम्मेदशिखर जी तेरापंथी कोठी में विराजमान है।
संघस्थ बा, ब्र, विशारद भैया ने हमे जानकारी दी बताया की माताजी की यह तपस्या इस प्रकार हो रही है
4 जनवरी को एक उपवास
5 जनवरी को पारणा (आहार)
6,7 जनवरी को उपवास
8 जनवरी को आहार
9 जनवरी को उपवास
10 जनवरी को आहार
11,12,13 को उपवास
14 जनवरी को आहार
15,16, को उपवास
17 जनवरी को आहार
18,19,20,21को उपवास
22 जनवरी को आहार
23,24,25 को उपवास
26 जनवरी को आहार
27,28,29,30,31को उपवास
1 फरवरी को आहार
2,3,4,5 फरवरी को उपवास
6 फरवरी को आहार
7,8,9,10,11 को उपवास
12 फरवरी को आहार
13,14,15,16,17 को उपवास
18 फरवरी को आहार
19,20,21,22 को उपवास
23 फरवरी को आहार
24,25,26,27,28 को उपवास
1 मार्च को आहार
2,3,4,मार्च को उपवास
5 मार्च को आहार
6,7,8,9,मार्च को उपवास
10 मार्च को आहार
11, 12 मार्च को उपवास
13 मार्च को आहार
14,15,16,मार्च को उपवास
17 मार्च को आहार
18 मार्च को उपवास
19 मार्च को आहार
20,21,मार्च को उपवास
22 मार्च को आहार
23 मार्च को उपवास
24 मार्च को आहार
इस तरह से उपास एवं पारणा होगा।
सभी सन्तो का मिला आशीष
परम पूज्य स्थविर आचार्य श्री सम्भव सागर महाराज,परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर गुरुदेव,परम पूज्य आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज, अंतरमना आचार्य 108 प्रसन्न सागरज महाराज,मुनि श्री108 पीयूषसागर महाराज द्वारा विशेष आशीष प्रदान की है।
हम सब भी अनुमोदना करे
अखण्ड जैन समाज,भक्तगण हाथ जोड़कर अनमोदना करें,गुरु माँ की तप साधना निर्विघ्न चलें,स्वास्थ्य उत्तम रहें,ऐसा विचार कर कम से कम नौ वार नवकार महामंत्र का जाप करें।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
