हमारे द्वारा अविवेक पूर्वक की गई क्रिया से यदि दूसरे के परिणाम व्यथित हुए हो तो वह भी हिंसा है शुद्धसागर महाराज

धर्म

हमारे द्वारा अविवेक पूर्वक की गई क्रिया से यदि दूसरे के परिणाम व्यथित हुए हो तो वह भी हिंसा है शुद्धसागर महाराज

कोटा

पूज्य युवा संत मुनि 108 श्री शुद्ध सागर ज महाराज ने अपने उद्बोधन में धर्म और अहिंसा के क्षेत्र में विवेक के उपयोग को लेकर तलवण्डी जैन मंदिर में कहा कि हमारे द्वारा अविवेक पूर्वक की गई क्रिया से यदि दुसरे के परिणाम व्यथित हुए तो वह भी हिंसा है,हमे पाप का बंध होगा क्योकि विवेक के बिना हमारे परिणाम निर्मल नही हो सकते।
हम भगवान की महाराज की वंदना करते है ताकि हमें बंध न हो लेकिन यदि हम इसमें भी विवेक काम मे नही लेंगे तो हमे पाप का बन्ध होगा। श्री जी को भावातिरेक में गुरुजनों को श्रद्धा के अतिरेक में में हम अविवेक पूर्वक नमस्कार करते है यह बंध का कारण बनता है।

पूज्य मुनिश्री ने खर पहले हम उद्देश्य बनाये की हम भगवान की मुनि महाराज की भक्ति क्यो कर रहे है? यदि हमारी मानसिकता ऐसी है कि मेरे कष्ट दूर हो जायेगे मेरे दुःख का निवारण हो जायेगा तो हम गलत मार्ग पकड़ रहे है। भगवान हमारी नैय्या को पार नही लगाएंगे जब तक हम उस मार्ग पर नही चलेंगे जो मार्ग भगवान ने अपनाया था तब तक हमारी नैय्या मंझदार में ही रहेगी हमारा भव पार नही होगा।
आगम की बातों को हम जब तक अपने जीवन मे आत्मसात नही करेंगे तब तक हमारी स्थिति उस मरीज के जैसी होगी जो डॉक्टर की बातों को सुनता तो है किंतु उन्हें फॉलो नही करता है और उसकी बीमारी कभी ठिक नही होती है।
मुनिजनों की वैय्याएल वर्त्ति में भी विवेक रखना उन पर आई विप्पति को दुविधा को दूर करना ही वैय्यावर्त्ति है किंतु हम इन बातो को न समझ कर उन्हें ओर असुविधा पहुचाते है यह भी बंध का कारण है।
दर्पण में देख कर हम हमारे शरीर की कलुषिता को दूर करते है उसमें स्वयं को देखते है, किंतु भगवान को देख कर स्वयं में बदलाव का प्रयास नही करते रोज भगवान की पूजन करते है उन्हें तो सुनाते है लेकिन स्वयं नही सुधरते तो हमारा कल्याण नही होगा। यदि हम अपना कल्याण करना है तो हमें जिन प्रभु द्वारा अपनाए मार्ग को अपनाना ही पड़ेगा अन्यथा हम इस संसार मे भटकते ही रहेंगे।
सम्मेद शिखरजी हमारी आस्था का केंद्र है
श्री सम्मेद शिखर जी पर सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के विषय मे मुनि श्री ने कहा कि शिखर जी हमारी आस्था का अटूट केंद्र है उस पर यदि किसी भी प्रकार की आंच आये तो हम समाज के सभी लोगो को एकजुट होकर अपना अहिंसक विरोध प्रदर्शन करना होगा और प्रशासन को यह बताना होगा कि हम यह बर्दाश्त नही करेंगे ।।
जानकारी देते हुए राजकुमार लुहाडिया ने बताया की इस अवसर पर श्री महावीर दिग्मबर जैन मंदिर सामिति के पदाधिकारी एवं समाज के सदस्य जन तथा रावतभाटा के श्रावक महावीर दुगेरिया भी उपस्थित रहे।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

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