कुंडलपुर में मिट्टी के बर्तन बिकने को आए व्रती अनिल जैन ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद एवं मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज की प्रेरणा से शुरू किए थे मिट्टी के बर्तन बनाना
कुंडलपुर
कुंडलपुर में होने जा रहे आचार्य पद आरोहण के लिए अब कुछ समय का वक्त बचा है। जिसका इतिहास साक्षी बनने जा रहा है।
कुंडलपुर तीर्थ में वृति अनिल जैन जो रोहतक से आए हैं। वे अपने साथ मिट्टी के बर्तन भी लाए हैं। इन बर्तनों का उपयोग संतों की आहार आदि में हो रहा है। कुंडलपुर में एक और भाई ना देखने को मिल रहा है कि अब धातु के बर्तन की बजाए अब आहार आदि बनाने में अब मिट्टी के बर्तन का उपयोग हो रहा है। मिट्टी के लोटे आदि का उपयोग किया जा रहा है।




श्री अनिल जैन इसके बारे में बताते हैं कि इससे जो भी कमाई होती है वह दान में लगा दी जाती है। इसका उद्देश्य बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य है कि स्वावलंबी बनाना। इसके साथ पुरानी परंपराओं से परिचित कराना।
पहले पाइप की फैक्ट्री थी मुनिश्री की प्रेरणा से मिट्टी के बर्तन का प्लांट लगाया
श्री जैन बताते हैं कि वर्ष 2017 में रोहतक नगर में मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी महाराज पधारे। तब मेरी पाइप की फैक्ट्री थी। मुनि श्री ने ही मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रेरणा दी। 18 महीने में प्लांट लगाया सभी बर्तनों को बनाने की डाई लेकर आए। पूरा डिनर सेट बना दिया। उसके बाद मुनि श्री को दिखाने दिल्ली गए। मुनिश्री ने देख कर प्रसन्नता व्यक्त की। महाराज श्री ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को दिखाने को कहा इन बर्तनों को लेकर वे 2018 में आचार्य श्री के पास खजुराहो पहुंचे वह दिन था मोक्ष सप्तमी का। आचार्य श्री ने अपने मुख से इन उत्पादन का नाम अग्नि परीक्षा रखा। आचार्य श्री ने प्रतिभा मंडल की बहनों को बुलाया श्री जैन को कहा कि इन्हें मिट्टी के बर्तन बनाना सिखाएं। प्रतिभास्थली जबलपुर, डोंगरगढ़ में प्लांट लगाने को कहा। और आशीर्वाद दिया। इसके बाद प्रतिभास्थली को प्रशिक्षित कर प्लांट लगवाया। जिन्हें अभी ग्लास बनाने का आर्डर मिला है।
बुंदेलखंड की युवा इसे स्टार्टअप बना सकते हैं अनिल जैन
जैन कहते हैं कि बुंदेलखंड के युवा छोटा प्लांट लगाकर स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं जो 4 से 6 लाख में लग जाता है। इससे स्वावलंबीबनेंगे और मिट्टी के बर्तन में खाने का स्वाद मिल सकेगा।
प्रेशर कुकर से लेकर थाली तक सभी बर्तन
श्री जैन इसके विषय में बताते हुए कहते हैं कि प्रेशर कुकर, थाली, बर्तन पानी की बोतल, तवा, कटोरी सहित पूरे बर्तन है। खिलौना चिड़िया भी है जिसमें पानी भरने पर आवाज निकलती है। मिट्टी के बर्तन के लिए लोच वाली मिट्टी लगती है। वह पीली, काली, लाल रंग की होती है। बर्तनों को मशीन द्वारा डाई से बनाया जाता है। इनको पकाने के लिए टनल बनाई गई है। जिसमें 1200 डिग्री सेल्सियस तापमान रहता है। इसमें बर्तन पकते हैं फिर बर्तनों को साफ किया जाता है। बस तार का गुंजा वर्जित होता है। बर्तनों के दाम₹100 से ₹1200 तक है। मिट्टी के गिलास की मांग ज्यादा रहती है। उन्होंने यह बर्तन संघ के मुनिराजो को भी दिखाए हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312
