वात्सल्य वारिधी श्री वर्धमान सागर महाराज का 27 वर्ष बाद बिजौलिया तीर्थ पर हुआ मंगल आगमन कुछ स्मृति

धर्म

वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज का 27 वर्ष बाद बिजौलिया तीर्थ पर हुआ मंगल आगमन कुछ स्मृति

पार्श्वनाथ की कमठकृत उपसर्ग निवारण, तप एवं केवल्य ज्ञान स्थली अतिशय क्षेत्र बिजौलिया नगरी में पंचम पट्टाचार्य वात्सल्य वारिधि आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 36 साधुओं सहित 27 वर्षों बाद 27 मई को 3.3 km विहार कर भव्य मंगल प्रवेश हुआ राजेश पंचोलिया से प्राप्त जानकारी अनुसार इसके पूर्व 2 फरवरी 1998 को आचार्य श्रीवर्धमान सागर जी का संघ सहित बिजोलिया में प्रवेश हुआ विंध्याचली पार्श्वनाथ तीर्थ क्षेत्र बिजोलिया भगवान श्री पारसनाथ की तपोभूमि धरणेंद्र पद्मावती द्वारा कमठ कृत उपसर्ग निवारण भूमि एवं केवल ज्ञान प्राप्ति स्थल है इधर उधर फैले बड़े-बड़े पत्थर कहानी कहते हैं
कमठ द्वारा किए गए उपसर्ग की 24 तीर्थंकरों के 120कल्याणको में राजस्थान में एकमात्र भगवान श्री पारसनाथ का केवल ज्ञान कल्याण के कल्याणी भूमि बिजोलिया है।तब पूर्व से विराजित आर्यिका श्री विशुद्धमति  माताजी ने संघ सहित आपकी आगवानी की। श्री भंवर लाल पटवारी निर्मित चौबीस जिनालय, भगवान श्री पार्श्वनाथ का समवशरण , तथा मान स्तम्भ की पंच कल्याणक प्रतिष्ठा 7 फरवरी से 13 फरवरी तक हुई इसी दौरान 9 फरवरी को बाल ब्रह्मचारी राजू भैया बने मुनि श्री अपूर्व सागर जी तथा विजय भैया बने मुनि श्री अर्पित सागर जी। रत्नत्रय रूपी संयोग रहा कि दीक्षा आचार्य गुरु और दोनों दीक्षार्थी शिष्य सनावद मध्यप्रदेश के हैं। तब दातार श्री भंवर लाल पटवारी को मेवाड़ रत्न की उपाधि से अलंकृत किया गया। आचार्य संघ का 15 दिन प्रवास रहा।

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *