परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ श्री आदिनाथ एवं चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर रेनवाल मांजी में धर्म की भव्य प्रभावना बढ़ा रही है
रेनवाल
भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी स संघ रेनवाल मांजी में धर्म की भव्य प्रभावना बढा रही है जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि आज प्रातः श्री जी का अभिषेक शांति धारा के बाद आर्यिका श्री ने अपने मंगलमय प्रवचन में सम्बोधित करते हुए कहा कि संसार में पदार्थ के साथ जीने वालों के लिए धन ही सब कुछ होता है।उनके लिए चरित्र का कोई मूल्य नहीं होता है बल्कि मात्र पैसे का ही सब कुछ होता है। विभिन्नता धन, चरित्र सुधरने से नहीं मिटती है। मनुष्य का समस्त चरित्र उसके विचारों से बनता है, चरित्र मानव की सर्वोच्च आवश्यकता और सर्वाधिक रक्षक है। इसका सच्चाई से अटूट संबंध है, सच्चाई को बहुमत की नही नैतिकता की आवश्यकता रहती है,करूणा ही आधार है जो जितना संवेदनशील होता है उसमें उतनी ही अधिक करुणा जागती है नैतिकता थोपी और दिखाई पड़ने वाली नहीं है.यह हमारे भीतर से उपजती है और उसके संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति अनुभूति करता है सत्य प्रेम, न्याय और त्याग ऐसे मानवीय सद्भाव है जो मनुष्य को मानव से ऊपर महामानव बनाते हैं, दृढता नैतिकता की कवच है, धन से धन की भूख बढ़ती है,तृप्ति कभी नहीं,धन साधन है, साध्य नहीं है। यह जीवन के लिए आवश्यक है परंतु जीवन नहीं है। धन का सबंध उदात्त गुणों और परोपकार से जुड़ने पर महत्वपूर्ण हो जाता है, विचारों से दृढवती धन के पीछे नहीं भागते सदाचरण जीवन में शासन करने वाला तत्व है, वह प्रतिभा से भी उच्च है। हमारा चरित्र हमारे उन कामों से पहचाना आंका जाता है जो लोग हम यह सोचकर करते हैं कि हमें कोई नहीं देख रहा है। व्यक्तिगत चरित्र से समाज को अधिक आशायें रहती है धन से सद्गुण नहीं उपजते मनुष्य गुणों से महान बनता है,जो गुण सामाजिक मूल्य नहीं बनते, वे दोष हो जाते हैं। स्वार्थ हो जाने पर कुछ नहीं दिखाई देता चरित्र, जीवन-मूल्य का कठोर संबध त्याग से है धन के सर्वोपरि की मान्यता ने ही सदाचरण को निगल लिया है। देश.समाज सर्वोपरि है, यह नैतिक मूल्यों की स्थापना से ही संभव है। प्रवृत्तियों का सर्वोत्तम उत्कर्ष एकांत में होता है, परंतु चरित्र का सुंदर निर्माण संसार के झंझावातों में ही संभव है। सत्य और सिद्धांत पर दृढ रहना ही चरित्र है। सदाचरण जीने की कला सिखाता है। कार्यक्रम बाद आर्यिका श्री ने सभी भक्तजनों को मंगलमय आशीर्वाद दिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
