समाधिस्थ मुनि श्री श्रेयस सागर की देह विधि विधान से पंच तत्व में लीन जन्म भूमि अब निर्वाण भूमि बनी
बौली
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर का कल भव्य ऐतिहासिक प्रवेश दीक्षित शिष्य मुनि श्री हितेंद्र सागर जी की जन्म भूमि बौली में हुआ।
आज सुबह 4,10 को संघस्थ मुनि श्री श्रेयस सागर जी महाराज की अनायास समाधि होने से प्रातः 9 बजे उनकी विमान यात्रा नगर से वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य एवम् हजारों धर्म भक्तो के साथ निवाई रोड़ स्थित सोगानी कालेज परिसर में पहुंची। इस डोला यात्रा में जैन महिलाए भी सम्मिलित हुई
नगर में किसी दिगम्बर जैन साधु की समाधि मरण का प्रथम अवसर था। पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भूमि शुद्धि एवम् विमान को कंधे लगाए गए।

कालेज परिसर में विधि विधान पूर्वक अग्नि स्थल की मंत्रोचार से शुद्धि की गई। मुनि श्री श्रेयस सागर जी महाराज का पुण्यार्जक पंसारी परिवार बोली द्वारा पंचामृत अभिषेक एवम् पूजन किया गया।
गृहस्थ अवस्था के पुत्र सुनील एवम् पुत्रियों दामादो द्वारा अग्नि संस्कार विधि पूर्ण की गई।
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिघि भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
