अपने आचरण को इतना श्रेष्ठ बनाओ कि कलयुग भी सतयुग बन जाएं…आचार्य प्रज्ञासागर…

धर्म

अपने आचरण को इतना श्रेष्ठ बनाओ कि कलयुग भी सतयुग बन जाएं…आचार्य प्रज्ञासागर…

पुष्पगिरी


भक्त जब भगवान के प्रेम में डूब जाता है तो उसे दुनिया दिखाई नहीं देती।आचार्य मानतुंग स्वामी भगवान वृषभ देव के प्रेम में ऐसे दीवाने थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वे कारागृह में है या वन में।वे तो भगवान की भक्ति में खोए थे इसलिए बंधन भी उन्हें बंधन नहीं लगे।उन्हें तो यह भी पता नहीं चला कि वे कब बंधन में बांधे गए और वे कब बंधन से मुक्त हुए।वे भगवान की भक्ति में इतने तल्लीन थे कि कब क्या हुआ उन्हें कुछ पता ही नहीं चला।ऐसे ही जो परमात्मा के प्रेम में खोता है उसे आज भी वैसी ही अनुभूति होती है।

उक्त विचार आनंदयात्रा के समय गुरुदेव के श्रीचरणों में बैठकर तपोभूमि प्रणेता प्रज्ञा सागर महाराज ने व्यक्त किये।
इसी तरह सुबह स्वाध्याय प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा-माना कि यह कलयुग है। परन्तु हमारा आचरण यदि सम्यक है तो हमारे लिए कलयुग भी सतयुग है।अतः यह कभी मत कहिये कि क्या करें कलयुग में तो ऐसा ही होता है।अरे इस कलयुग को सतयुग बनाना आपके हाथ में है।जिस दिन आचरण सुधर जाएगा उसी दिन तुम सतयुगी हो जाओगे।अतः कभी नहीं मानता कि मेरा जन्म कलयुग में हुआ है मैं तो जिस दिन से मोक्षमार्गी बना हूँ उसी दिन से सतयुग में जी रहा हूँ।

 

 

 

 

पूज्य महाराज श्री ने सुबह मांगलिक पाठ के बाद गुरुचरणों में बैठकर आचार्य वन्दना की।दर्शन करके अभिषेक देखा और शांतिधारा करवाई।बाद में जंगल से आकर शास्त्र स्वाध्याय किया।आचार्य जयसेन स्वामी कहते है जिस तरह से तीर्थंकर भगवान की मूर्ति बनाकर पूजा की जाती है उसी तरह पूर्वाचार्यो की,मुनिराजों की मूर्ति बनाकर विद्वानों को उनकी पूजा करनी चाहिए।

स्वाध्याय के बाद और आहारचर्या के पहले सोनकच्छ समाज के लोग निवेदन हेतु आएँ।उनके निवेदन को सुनकर और मानकर गुरुवार की सुबह 8 बजे पुष्पगिरी से विहार करके 9 बजे सोनकच्छ प्रवेश का समय महाराज श्री ने दिया।सोनकच्छ में 15 से 18 दिसम्बर तक चार दिवसीय एक प्रवचन माला की स्वीकृति दी है।इस अवसर पर विविध विषयों पर बात करते हुए अपने विचार व्यक्त महाराज श्री करेंगे।

दोपहर में स्वाध्याय के बाद महाराज श्री ने दिनेश जैन सुपरफार्मा परिवार अपनी पोती को दर्शन करवाने के लिए पुष्पगिरी लेकर आएं। महाराज श्री ने बच्ची को णमोकार मन्त्र सुनकर जैन बनाया।इस तरह सुपरफार्मा परिवार में एक जैन सदस्य की वृद्धि हुई।

इस पर आचार्य श्री ने कहा की सबसे बड़ी बात यह रही जब बच्ची को मेरे पास लाया गया वह नींद से उठकर मुझे निहारती रही।मैंने भी उसे उसके उज्ज्वल भविष्य एवं सुखद जीवन के लिए मङ्गलमय आशीर्वाद दिया।गुरुदेव ने भी उसे अपना आशीर्वाद देकर कृतार्थ कर दिया।

शाम आनंदयात्रा के समय गुरुदेव पुष्पदंत सागर महाराज ने ने आशीर्वाद देते हुए कहा-प्रज्ञासागर जी के चौड़े माथे को देखकर मैंने 37 साल पहले ही कह दिया था कि वह बालक विवेक,एक दिन विवेक से विवेकानंद बनेगा और आज मैं वही देखकर रहा हूँ।इनके माध्यम से जो प्रभावना हो रही है वह अद्वितीय है।गुरुदेव के आशीर्वचन के बाद क्षुल्लक पर्वसागर जी ने महाराज ने रोज की तरह आज भी गुरुदेव की मङ्गलमय आरती करवाई।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

 

 

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