गुरुदेव जब हमें कुछ देते हैं तो प्रसन्नता तो होती ही है विमर्श सागर महाराज
भिंड
सकल दिगंबर जैन समाज भिंड द्वारा आचार्य श्री 108 विमल सागर महाराज का चार दिवसीय रजत दीक्षा महोत्सव मनाया जा रहा है। इस महा महोत्सव के द्वितीय दिवस पर ध्वजारोहण एवं मंडप का लोकार्पण किया गया।
इस महा महोत्सव में बड़ी संख्या में भक्तजन बैंड बाजों की मधुरी में धोनी के साथ आचार्य गुरुवर की अगवानी करने चैत्यालय मंदिर आए। जैन मंदिर से पद विहार करते हुए पूज्य आचार्य श्री इस महा महोत्सव में सम्मिलित होने हेतु कीर्ति स्तंभ जैन मंदिर आए।

पूज्य आचार्य श्री ने अपने आचार्य पदारोहण दिवस के अवसर पर कहा कि आज का यह पावन दिन मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता व प्रफुल्ल लता का है। आगे बोलते हुए कहा कि गुरुदेव जब हमें कुछ देते हैं तो प्रसन्नता तो होती ही है। आचार्य पद को जिम्मेदारी भरा बताते हुए कहा कि मेरे गुरुवर गणाचार्य विराग सागर महाराज ने मुझसे यह कहा था कि अब आप अपने साथ साथ अन्य भव्य जीवो का भी कल्याण करें। इस जगत को कोई उन्नति को प्राप्त होता है, वह अपने से श्रेष्ठ व्यक्तित्व की शरण को प्राप्त होकर ही होता है। जिनेंद्र भगवान की आज्ञा ही जिनशासन कहलाता है। उन्होंने आचार्य परमेष्टि आज्ञा को पालन करने के मार्ग को जिनशासन की उन्नति का मार्ग बताया। गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि आचार्य गुरुवर विराग सागर महामुनिराज ने मुझे जिनशासन की उन्नति के योग्य समझा। और यह आचार्य पद प्रदान किया। उन्होंने कहा मैं यहीं से गुरु चरणों में नमोस्तु निवेदित करता हूं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
