संत के बिना कोई परमात्मा से साक्षात्कार नहीं कर सकता है, संत समागम स्वर्गदायी है तो परमात्मा का मिलन मोक्षदायी है आर्यिका  विज्ञा श्री         

धर्म

भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर जयपुर में बढ़ा रही है धर्म की भव्य प्रभावना संत के बिना कोई परमात्मा से साक्षात्कार नहीं कर सकता है, संत समागम स्वर्गदायी है तो परमात्मा का मिलन मोक्षदायी है आर्यिका  विज्ञा श्री

 

 

जयपुर
भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी जयपुर के श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर जयपुर में ‌ धर्म की भव्य प्रभावना बढ़ा रही है , जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि आज जिनालय में प्रातः श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा ,एवं अष्टद्रव्यों से पूजा के बाद गुरु मां ने अपने प्रवचन में
संतो का समागम पाकर बैकुण्ठ पर अपना नाम लिखाया जा सकता है | संतो की वजह से ही आज भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता है | संत ही सत्य की आंख दे सकते हैं दो आंखे हमे अपने माता पिता से ही मिल जाती है लिकिन तीसरी आंख परम पिता परमात्मा से प्राप्त होती हैं लेकिन संत परमात्मा से मिलाने के लिए एजेंट का काम करता है ,संत के बिना कोई परमात्मा से साक्षात्कार नही कर सकता है संत समागम स्वर्गदायी है तो परमात्मा का मिलन मोक्षदायी है, संत परमात्मा का ही प्रतिबिम्ब है संत जीती जागती रामायण , गीता कुरान पुराण हैं। कार्यक्रम बाद आर्यिका श्री ने सभी भक्तजनों को मंगलमय आशीर्वाद दिया।

*राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान*

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