पारसनाथ गिरिडीह रेल लाइन मार्ग निर्माण राशि की आस में अधूरा
गिरिडीह
एक सपना जो अधूरा है हम बात कर रहे हैं पारसनाथ से मधुबन की ओर और मधुबन से गिरिडीह तक रेलगाड़ी से सफर की यह सपना अभी तक केवल सपने रूप में ही रह गया है। वित्तीय वर्ष2022,2023 जब केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभिक फंड की स्वीकृति प्रदान की थी और झारखंड के इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना के लिए 50 करोड रुपया का फंड निर्गत किया था। तब सभी को उम्मीद जगी थी, परियोजना के इस काम में द्रुतगति आएगी। लेकिन झारखंड सरकार ने इसे अभी ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यह परियोजना तब तक अधूरी रहेगी जब तक झारखंड सरकार इस फंड को रिलीज नहीं कर देती।
केंद्रीय रेल बोर्ड एवं राज्य सरकार को इस परियोजना में 50 ,50 प्रतिशत राशि को खर्च कर रहे हैं। इस परियोजना की लागत पर यदि नजर डालें तो 902 करोड 8600000 रुपए का है। इसमें राज्य सरकार को 451 करोड़ 43 लाख रुपए देना है। इसके अलावा केंद्र के अनुरूप राज्य सरकार यदि तत्काल 50 करोड़ निर्गत करती है तो इस परियोजना का काम पुनः शुरू हो सकता है। परंतु बड़े बजट के अभाव में राज्य सरकार इस परियोजना की ओर ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में इस परियोजना काम शुरू नहीं होने पर केंद्र सरकार ने अपनी भेजी हुई 50% की राशि वापस ले सकती है। और यह रेल परियोजना स्थाई रूप से लटक सकती है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विधिवत शिलान्यास 2019 में गिरिडीह के उस समय के रहे सांसद रविंद्र पांडेय ने किया था। लेकिन शिलान्यास के 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह परियोजना धरातल पर नहीं आ पाई है।
पारसनाथ गिरिडीह है परियोजना का निर्माण होना तय है विधायक सुदीव्य कुमार सोनू

इस विषय पर बोलते हुए गिरिडीह के विधायक सुदीव्य कुमार सोनू ने वी कहा कि इस परियोजना का निर्माण होना तय है। इस पर जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री महोदय से इस विषय पर वार्ता हो चुकी है। यह परियोजना गिरिडीह जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी। जिससे देशभर से आने वाले जैन भक्त के साथ गिरिडीह का इलाका रेल मार्ग से जुड़ जाएगा।
जैन समाज में लिखा मुख्यमंत्री को पत्र
जैन समाज के के प्रमुख कमल जैन विनायका सहित अन्य लोगों ने यह मांग की है कि झारखंड सरकार जल्द इसकी राशि को आवंटित करें। इसमें राज्य की जैन समाज के लोगों के साथ आध्यात्मिक यात्रा करने वाले प्रेरकों की संख्या भी बढ़ेगी। साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इनकी पारसनाथ पहाड़ पर साल भर में देशभर से लाखों जैन यात्री पहुंचते हैं। ऐसे में जब रेल लाइन शुरू हो जाएगी तो जैन समाज के लोगों के साथ अन्य धर्मावलंबियों के लिए आवागमन सुगम होगा। इस बाबत झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए विभाग ने 78 .27 करोड़ रुपए रेवती रेलवे को देने की मांग की है। जिसमें 2022 23 के शुरुआती दौर में रेलवे बोर्ड ने ₹50 करोड़ रुपया आवंटित कर दिया है। यदि राज्य सरकार तत्काल ₹50 करोड़ निर्गत कर देती है तो काम आरंभ हो जाएगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
