दिगम्बर जैन सन्त अन्तर्मना आचार्य गुरुदेव के 500 उपवास 2 को पूर्ण,.. भक्तों में उत्साह28 जनवरी को होगा महापारणा महोउत्सव देश भर में पूजन भजन आरती व दीप उत्सव मनेगा
सम्मेदशिखर जी-:-
आचार्य भगवन कहते है कि अगर आप किसी भी काम में पूरी तन्मयता से डूब जाते हैं, तो समझो जीवन मे आध्यात्मिक प्रक्रिया वहीं शुरू हो जाती है,। …..इसी आध्यात्मिक से अपना तन मन और जीवन को तप साधना में समर्पित करने वाले तीर्थंकर मार्गी अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज अपने 500 वे सिंहनिष्कंडित व्रत पूर्ण हुआ है। गुरुदेव की 500 दिन की साधना आगामी 2 दिसंबर 2022 को पूरी हो गई है।
उपवास की साधना में गुरुदेव के उपवास निर्विघ्न पूर्ण होने पर भक्तो में अपार उत्साह है।….. कहते है ना कि गुरु समस्त मंत्रों का मूल गुरु है और गुरु ही परम तप है। गुरु की प्रसन्नता मात्र से शिष्य सिद्धि को प्राप्त कर लेता है। गुरु की कृपा से शक्ति प्रसन्न होती है और शक्ति की प्रसन्नता से मोक्ष प्राप्त होता है। ऐसे गुरु जिनकी साधना मात्र से भक्तो का पुण्यप्रवलता की और बढ़ रहा हो तो भक्तो की खुशी अपने आप अंतर्मन से उत्साहित हो रही है। इसी उत्साह को आत्मा अनुभूति की ओर लेजाने के लिए भक्त गुरुदेव के 500 उपवास पूर्ण होंने पर व आगामी होने वाले उपवासों की सफलता के लिए मंत्र जाप, आरती, पाठ व व्रत की सफलता की कामना करगे।
जैन धर्म के सबसे बड़े तीर्थ शिखर जी के 20 पंथी कोठी में ससंघ विराजमान अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज अपने उपवास की साधना में लीन है। उन्ही के शिष्य सौम्य मूर्ति मुनि पीयूष सागर जी महाराज के सानिध्य में अपने गुरु के उपवास काल मे प्रतिदिन जिनेंद्र भक्ति कराई जा रही है। सुबह से जिनसहस्त्र नाम पूजा कलशाभिषेक शन्तिधारा प्रवचन व शाम को गुरुभक्ति आरती का लाभ भक्तो को मिल रहा है। आगामी 27 जनवरी को गुरुदेव के 557 दिन की मोन तप सिहनिष्कंडित उपवास की साधना पूर्ण हो रही है। जहाँ उनका महा पारणा कराया जाएगा जिसे लेकर तैयारी पूर्ण है। हाल में होने वाले पारणा दिवस पर गुरुदेव की एक झलक पाने को भक्तो का तांता लगा हुआ है। भक्तो की प्रेम समर्पण को अपने ह्रदय में विराजमान कर गुरुदेव भी समय समय पर अपना आशीर्वाद भक्तो प्रदान कर रहे है।
मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा, विवेक गंगवाल कोलकाता से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
