शिक्षा केवल भविष्य बनाने के लिए नहीं हो,उसमें नैतिकता हो, संवेदना हो, संस्कार हो पूर्णमति माताजी
उज्जैन
आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्या पूर्णमति माताजी ने कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान के अंतर्गत अपनी वाणी के द्वारा बताया कि हम छोटे छोटे कदम उठाकर जीवन में बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि पालक बच्चे से अच्छे भविष्य की उम्मीद करते हैं तो बालक उन्हें पहले संस्कार दें और उन्हें दादा दादी, नाना नानी की कहानी सुनाए। पालक हमेशा शिकायत करते हैं कि बच्चे हमेशा अधिकांश समय मोबाइल या टीवी के सामने बिताते हैं। इसका उपाय बताते हुए माताजी ने कहा कि उन्हें दादा दादी नाना नानी की कहानियां सुनाएं। अपने बुजुर्गों के बारे में बताएं। साथ ही उन्हें परंपरागत खेलों की ओर ले जाएं।
पूज्य माता जी ने अपने वचनों में युवाओं को सीख देते हुए कहा कि पढ़ाई करें ,उसके साथ साथ बड़ों का आदर करें, भविष्य को बनाने के लिए नैतिक शिक्षा पर भी जोड़ दें। नवीन तकनीक पर ध्यान आकृष्ट करते हुए माताजी ने कहा केरी आज की नई तकनीक में दो पहलू हैं, एक अच्छा, दूसरा खराब। और जो अच्छा है उस पर अपना ध्यान केंद्रित करें। और अपने माता-पिता से खुलकर मन की बात करें। माताजी ने संयुक्त परिवार के विषय में जोर दिया। पहले बड़ा परिवार होता था तो दिन भर काम करने के बाद सभी शाम को मिला करते थे, रात में भोजन करते थे। बात बात में बड़ी समस्याओं का समाधान निकल जाता था, अब एकल परिवार होने से सब बदल गया है।
आज की शिक्षा कैसी हो इस पर भी माताजी ने प्रकार डाला कहां की शिक्षा केवल भविष्य बनाने के लिए नहीं हो,उसमे नैतिकता हो,
उन्होंने महावीर कैसे बने इस पर भी अपने वचन में बताया कि हर व्यक्ति में महावीर बनने का सामर्थ्य है, वही तेज है, जरूरत है उसे पहचान करने की। उसे निखारने की, तप करने की। महावीर ने यही किया, वह भी साधारण व्यक्ति थे, लेकिन उन्होंने अपने तप के बल पर महावीर का पद प्राप्त कर लिया।
उज्जैन नगर में दिग्विजय यात्रा निकाली जाएगी। जानकारी अनुसार यह यात्रा फ्रीगंज आचार्य विद्यासागर अतिथि भवन से शुरू होकर शहीद पार्क, कल्याणमल जैन मंदिर, टावर चौक होकर श्री पारसनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर आएगी। इस यात्रा की खास बात यह रहेगी कि जगह जगह यात्रा मार्ग पर चक्रवर्ती का भव्य स्वागत होगा।
संकलन
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
