जब तक मोह है ,तब तक मोक्ष नहीं होगा। मोहनीय कर्मों की प्रबलता को नष्ट करने पर ही शाश्वत सुख मोक्ष प्राप्त होगा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
श्री महावीर जी
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवम् भगवान श्री महावीर स्वामी के 24 वर्षो बाद प्रारंभ महामस्तकाभिषेक में सानिध्य हेतु विराजित वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संबोधन में बताया कि आज प्रात कालीन बेला में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव से पूर्ण हुई। इससे यह संदेश मिलता है कि संसारी प्राणी की भांति भगवान महावीर स्वामी बंधन को प्राप्त थे। उन्होंने बंधन को दूर किया अर्थात 8 कर्मों का नाश करके सिद्ध अवस्था को प्राप्त हुए । यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री महावीर भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर उद्बोधन में की।
आचार्य श्री ने आगे उपदेश में बताया कि सभी स्वाधीनता चाहते हैं मुक्त होना चाहते हैं, किंतु राग द्वेष की परिणिति कारण आप संसारी कर्मों को आव्हान करते हैं। 8 कर्म घातिया और अघातिया कर्मों के रूप में विभाजित हैं।
जो रागी होता है वह कर्मों के बंधन में बंध जाता है, ऐसा कोई प्राणी नहीं है जो अभी तक कर्मों के बंधन में नहीं बंधा है। जितने भी तीर्थंकर हुए हैं ,उन्होंने भी जन्म लेकर निर्वाण को प्राप्त किया है। वह भी कर्मों से बंध कर अनेक भव में अनेक पर्याय में उन्होंने भी भ्रमण किया है। आपने मोक्ष कल्याणक में 14 गुणस्थानों के क्रम को सुना है ।आज श्री महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक हुआ है ।भगवान श्री आदिनाथ से लेकर भगवान श्री पार्श्वनाथ तक सभी तीर्थंकरों ने पहाड़ों से मोक्ष को प्राप्त किया है।किंतु श्री महावीर स्वामी ने सरोवर पृथ्वी से मोक्ष को प्राप्त किया है कर्मों के पहाड़ पर आप सभी चढ़े हुए हैं ।जब तक इन कर्मों के पहाड़ को तोड़ेंगे नहीं, इन्हें दूर नहीं करेंगे ,इन्हें हटाएंगे नहीं, तब तक मुक्ति नहीं होगी। मरीचि का जीव जो कि प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के पुत्र भरत के पुत्र रहे हैं ,मरीचि के पर्याय से अनेक भव में घूमते हुए उन्होंने शेर की पर्याय में जब चारण रिद्धि धारी मुनियों का संबोधन सुना। उन्होंने मनुष्य पर्याय प्राप्त कर श्री महावीर स्वामी की पर्याय में कर्मों को पृथक कर चेतन आत्मा ने शाश्वत मोक्ष प्राप्त किया।

आचार्य श्री ने आगे उपदेश में कहा कि पंचकल्याणक में 5 दिन गर्भ ,जन्म तप ,ज्ञान कल्याणक के बाद मोक्ष कल्याणक को आपने देखा।पंचकल्याणक में विभिन्न दृश्य दिखाए गए यह आमोद प्रमोद या मनोरंजन की वस्तु नहीं है भगवान के पंचकल्याणक को देखकर आपको जीवन में परिवर्तन लाना चाहिए, सीख लेना चाहिए कि जिस प्रकार भगवान को मोक्ष हुआ है हमें भी क्रम से कर्मों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। और इसके लिए पिछले प्रवचन में भी बताया गया है कि पहले हम श्रावक बने अणुव्रत लेवे, महाव्रत का पालन कर तप के माध्यम से कर्मों को नाश करें, हमें भी मोक्ष मिल सकता है ।जितने भी पात्र बने हैं , आप सबकी मुक्ति होगी अर्थात पंचकल्याणक के बाद आप अपने अपने घरों में जाएंगे क्योंकि घर में जाने से आपको सुख मिलता है भगवान भी अपने घर गए अर्थात मोक्ष गए वहां शाश्वत सुख है ,घरों में क्षणिक सुख है ,संसार में दुख है ,और सुख मोक्ष में प्राप्त होता है पुरुषार्थ के बल पर कर्मों का नाश कर शाश्वत सिद्ध अवस्था मोक्ष को प्राप्त करता है । इसके लिए जीवन में मोह को दूर करने पर ही मोक्ष प्राप्त होगा, जब तक मोह है तब तक मोक्ष नहीं होगा। मोहनीय कर्मों की प्रबलता का नाश करने पर ही शाश्वत मोक्ष प्राप्त होगा। मोह के कारण ही प्राणी संसार में भ्रमण करता है। आचार्य श्री ने प्रवचन में आगे बताया कि संकल्प शक्ति से ही कार्य पूर्ण होता है। संकल्प शक्ति से अच्छे शुभ कार्य समय पर पूर्ण होते हैं। इसलिए आपको भी जीवन में परिवर्तन लाने के लिए अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करने के लिए पुरुषार्थ प्रयास करना होंगे,संकल्प करना होगा। आप सभी को मंगल आशीर्वाद।
इसके पूर्व प्रात काल में मोक्षकल्याण महोत्सव सोमवार, दिनांक 28nov 2022प प्रातः 7.00 बजे श्री जिनाभिषेक एवं नित्यार्चना मोक्षकल्याणक दृश्य अग्निदेव द्वारा संस्कार विधिश्री जमनालाल हपावत परिवार मुंबई द्वारा श्री महावीर स्वामी के मोक्ष कल्याणक के बाद संस्कार विधि पूर्ण किए गए।
मोक्षकल्याणक पूजा, हवन पूर्णाहुति, आचार्य श्री के प्रवचन के बाद दोपहर को प्रातः 11.15 बजे वेदी में भगवान विराजमान, कलशारोहण एवं ध्वजारोहण किया गया। दोपहर12.00 बजे विसर्जन,दोपहर 12.15 बजे
खड्गासन प्रतिमा श्री महावीर भगवान का पंचामृत महामस्तकाभिषेक एवम शांति धारा श्री विवेक काला परिवार जयपुर द्वारा एवंचौबीसी प्रतिमाओं का मस्तकाभिषेक प्रतिमा प्रदाता परिवारों द्वारा किए गए।महाआरती के बाद शास्त्र सभा हुई।रात्रि 9.00 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए।
राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
