आर्यिका विज्ञान मति माताजी का टीकमगढ़ में हुआ मंगल आगमन
टीकमगढ़
नगर की नंदीश्वर कॉलोनी में आचार्य गुरुवर विवेक सागर महाराज की शिष्या आर्यिका 105 विज्ञान मति माताजी संघ का आगमन हुआ। सोमवार की बेला में विज्ञान मति माताजी एवं आदित्यमति माताजी के मंगल प्रवचन हुए 2017 की स्मृति को लाते हुए कहा कि नंदीश्वर कॉलोनी में हमारा चातुर्मास हुआ था उस चतुर्मास के समय टीकमगढ़ नगर में आदिनाथ धाम की नीव डाली गई थी अभी यहां आज आदिनाथ त्रिकाल चौबीसी बनकर तैयार है। पंचकल्याणक महोत्सव की तैयारियां जोरों पर है। राजस्थान से आए 40 मजदूर दिन रात इसे अंतिम रूप दे रहे हैं। उन्होंने सभी की सराहना करते हुए कहा कि आप लोगों की मेहनत लगन से ही यह काम पूरा हो सका है।
उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि यह धाम आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद एवं मुनि श्री सुधा सागर महाराज के निर्देशन में हो रहा है।
उन्होंने संस्कारवान होने पर अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि अपने बच्चों को संस्कारवान बनाएं। हमको पाठशाला में धर्म की शिक्षा हेतु जरूर भेजें। धर्म के बिना जीवन अधूरा है। जब तक बच्चे संस्कारवान नहीं होंगे तब तक हमारा समाज संस्कारवान नहीं बन सकता है। जोड़ देते हुए कहा कि हम संस्कारित भारत की कल्पना तभी कर सकते हैं। जब हमारे बच्चे संस्कारवान होंगे।
माताओं को सीख देते हुए माताजी ने कहा कि मां अपने बेटे को धार्मिक संस्कार के द्वारा ही अच्छा इंसान बना सकती है। धर्म के संस्कार द्वारा ही अपने बेटे को भगवान बना सकती है। यह शक्ति केवल मां में ही होती है। मा बच्चे की पहली पाठशाला कहीं जाती है। इसलिए बच्चे भी अपनी मां से ही संस्कार सीखते हैं। अच्छे बुरे का ज्ञान भी मां से ही होता है। हम जैसे संस्कार अपने बच्चे को देंगे, बच्चे उसी राह पर चलेंगे।
अदा करते हुए कहा कि आज बच्चों को अभिभावक उच्च शिक्षा को बेहतर शिक्षा दिलाने हेतु विदेश भेज देते हैं, लेकिन वह बच्चे हमारी भारतीय संस्कृति को छोड़कर पाश्चात्य सभ्यता की ओर मुड़ रहे है। अंत में कहा की बच्चों को विदेश में पढ़ने जरूर भेजें लेकिन उन्हे हमारी संस्कृति, संस्कारों की मर्यादा में बांधकर रखें।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
