विज्ञान के प्रति वफादार बनने की जगह सम्यकज्ञान के प्रति वफादार बने जिनशिशु प्रज्ञाश्री जी
साध्वी गुणरंजना श्री का हुआ भानपुरा मगल आगमन
रामगंजमंडी
शहर के बाजार नंबर 3 में स्थित जैन श्वेताम्बर मंदिर में प्रवचन सभा में सर्वप्रथम साध्वी श्री भाग्योदया श्रीजी ने प्रवचन मे कहा कि इंसान को संपति का भय,बीमारी का भय, व्यापार का भय है, बाहर के भय है खूब सता रहे है। लेकिन इंसान को असली भय जो सताना चाहिये उस पर ध्यान नहीं है और असली भय है जन्म मरण बंद हो जावे- संसार अगर सुहाना होता तो भय नहीं लगता।संसार अगर डरवाना ओर भयावह लग रहा है तो आदमी को अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने का पुरुषार्थ करने की बात साध्वी जी ने कही- इंद्रियों की गुलामी की वजह से आदमी परेशान है। स्वयं के नोकर बनने की जगह मालिक बनना सभी को आना चाहिये दूसरों के मालिक बनने की जगह अपनी इंद्रियों के मालिक बनो.उन्होंने कहा हिरण को पकड़ने के लिये संगीत सुनाया जाता है, सांप को पकड़ने के लिये बीन बजाई जाती है उसी प्रकार मोक्षप्राप्त करने के लिये इंद्रियों को वश में करना जरूरी बताया। भाग्योदया श्री जी के मंगल उद्बोधन के बाद साध्वी श्री कृपा निधी जी ने एक सुन्दर
भजन “ऐ वीर महावीर की भक्ति से बडी संसार कीदोलत क्या होगी जिन धर्म हो है अनमोल रतन इसकी भीमतम्पा होगी. गाकर प्रवचन कक्ष को भक्तिमय बना दिया।
वही अंत में साध्वी जिन शिशु प्रज्ञा श्री जी ने प्रवचन मे कहा कि विज्ञान के प्रति वफादार बनने की जगह सम्यक ज्ञान के प्रति वफादार बने,उन्होंने कहा ए रामगंजमंडी में कितनी बार चार्तुमास हो गये अब बार बार पहली क्लास में बी बैठना और पढ़ना बंद होना चाहिये। धर्म को सुनना दुर्लभ, धर्म को श्रवण करना उससे भी दुर्लभ और परमात्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा उससे भी दुर्लभ बताया गया है।तांत्रिक ओर ज्योतिषीयों के पास जाने से शनि के साथ साथ सोनी भी सताता है। कर्म सिद्धान्त ओर जिनवाणी को समझने वाले कभी तांत्रिक ओर ज्योतिष के पास नहीं जाते-भाग्य को बदलने की ताकत किसी मे नही होती।प्रवचन में देरी से आने वालो को इंगित करते हुए साध्वी प्रज्ञा श्रीजी ने कहा कि संत और साध्वियो की दुकान
एक घंटे ही खुलती है उसमे देर करना अनुचित है।
चातुर्मास का सार :
– दोषो का विनाश ओर सद्गुणों का
विकास ज्यादा होता है उसे चार्तुमास कहते हैं।मानवता पर बोलते हुए साध्वीजी ने कहा कि पड़ोसी के घर मे
लाश पड़ी हो ओर कोई अपने घर में आर रसगुल्ला खा रहा है तो यह मानवता के लिये अभिशाप है)। किसी दुखी ओर पीडित को देख कर अगर खुद मे पीडा नहीं आई तो मानवता के लिये खतरा है। भगवान महावीर स्वामी ने अपनी अंतिम देशना मे सब जीव कैसे सुखी रह सकते है। आई इतना बताया कि 36 हजार साल तक भी हम प्रवचन दे तो भी खत्म नही होगा-।
जैन श्वेताम्बर श्री संघ के अध्यक्ष राज कुमार पारख ने बताया कि संभवतया आज दोपहर में तीन बजे साध्वी मंडल का रामगंजमंडी से अष्टापद के लिए विहार होगा- विहार में पूरा श्री संघपैदल साध्वी जी के साथ बिहार में साथ रहेगा –

:- चार्तुमास करने पधारी साध्वी जी गुणरंजना श्रीजी के संधारा से भानपुरा बिहार में रामगंजमंडी से पूर्व पार्षद एस साक्षी पारख, सुरेंद्र रांका, गोरव बाफना, सोरभ तिल्लानी संकेत बी बाफना17 किलोमीटर पैदल चले। साध्वी जी का भानपुरा मंगल प्रवेश हो गया है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
