अज्ञानी होते है वे लोग जो सुखों में भी दुखो को ढूंढते है विज्ञमति माताजी
ग्वालियर
प्रज्ञा पद्मनी गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने सुख और दुख के विषय में अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के जीवन में कभी दुख ना आया हो या कभी सुख ना आया हो
ऐसा तो हो नहीं सकता क्योंकि बिना दुख के सुख कीमत का एहसास नहीं होता, एक उदाहरण के माध्यम से बताया की जैसे बिना नमकीन के मीठा ज्यादा नहीं खाया जा सकता

उसी प्रकार उन्होंने कहा अज्ञानी होते हैं जो सुखों में भी दुखों को ढूंढते हैं दुखों में भी सुख को खोजने वाला व्यक्ति ज्ञानी होता है आगे बोलते हुए कहा अपने भीतर के नकारात्मक विचारों से ही दुखों का जन्म होता है सीख देते हुए माताजी ने कहा की अपनी सोच बदलिए सकारात्मक सोच से ही तुम अपने दुखों को भी आसानी से सहन कर सकते हैं।
संकलन
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
