हमारी संस्कृति झुकना सिखाती है प्रज्ञासागर महाराज
उज्जैन
लक्ष्मीनगर में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में प्रज्ञासागर महाराज ने कहा की भगवान (अरिहंत) के चरणों में नमस्कार करने से आनंद एम मिलता है। उन्होंने कहा चरण छूने, हाथ जोडने से अहंकार दूर हो जाता है। हमारी संस्कृतिझुकाना सिखाती है। पैर छूने का,धोक लगाने का फायदा है, हमने बचपन में देखा है बच्चे बड़ों कोधोक देते थे तो बड़े उनको पैसे दे जाते थे। भगवान को नमन करने का फल मिलता है। साक्षात फल विनयमोक्ष का द्वार है। अहंकार अंधकार है।
उन्होंने कहा झुकना सीखो, अकड़ना नहीं। झुकेंगे तभी सुख आएगा। बार-बार हाथ जोड़ता है, वही नेता बनता है।आज जैसे ही भक्तों ने जिनवाणी दी मैंने झुककर नमस्कार किया।
उन्होंने कहा गो माता को,धरती को प्रणाम करते हैं, जिसने हमें जीवन दिया। मां का हाथ रक्षा कवचहै, सुरक्षित रहते हैं। मेरे पास अतिथि आते रहते हैं। चाहे कोई भी पार्टी का हो।संत सबके होते हैं। पूजा स्थलपर आने के बाद अतिथि परमात्माका हो जाता है, कोई भेदभाव नहीं होता।
समाज सचिव डॉ. सचिन कासलीवाल एवं सुशील लुहाडिया ने बताया कि नितिन झांझरी विधानाचार्यके निर्देशन और जैन समाज केसहयोग से श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लक्ष्मीनगर, सेठीनगर मेंउत्साह, उमंग व लगन के साथ 9नवंबर तक श्री सिद्धचक्र महामंडलकी श्रृंखला सुबह 6.30 से दोपहर1 बजे तक चल रही है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
