चरणों की रज लेते हुए वीर विशाल धवल ने की प्रणम्य चन्द्र की आगवानी
द्रोणगिरि
प्रमुख पावन तीर्थ द्रोणगिरी तप त्याग की पावन धरा है यदि इस क्षेत्र का वर्णन किया जाए तो यहाँ ज़न ज़न के आराध्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने समयसागर महाराज को यही मुनि दीक्षा देकर मुक्ति के पथ की और आरूढ़ किया था एक बार पुनः उन्ही के गुरुकुल की शिष्य मंडली पूज्य प्रणम्य सागर महाराज, चन्द्रसागर महाराज,वीर सागर महाराज, विशाल सागर महाराज, धवल सागर महाराज के महामिलन 13 जनवरी 2022 को हुआ। तप की पावन मूर्ति को हर कोई बस देख रहा था नमन कर रहा था।
मैं तो कहूंगा आचार्य भगवन ने कलयुग में सदयुग के जैसी शिष्य मंडली को तैयार किया है जो स्व और पर के कल्याण की भावना से ओतप्रोत है।

मेने जब स्वयम महामिलन के दृश्यों इन पलो को देखा तो मन भाव विहल हो गया यह मिलन महामिलन ही कहा जाएगा,जी हा जेसे ही वीर विशाल धवल धर्म रूपी त्रिवेणी मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज चंद्रसागर महाराज के समीप आई उन्हें देख भाव विहल हो गए मस्तक को झुकाते हुए उन्हें नमन किया और उनकी परिक्रमा की अदभुत है ये मिलन, ये अनुराग जो यह सीख देता है विनय भाव क्या होता है। इन पंचऋषिराज के महामिलन से विनय सम्पन्न भावना का यथार्थ परीलक्षित हुआ। जिसे शब्दो की सीमा भला क्या बाँध पाएगी। इन पलो के बाद समस्त संघ ने इस पावन तीर्थ की वंदना की वह साथ ही गुरुभक्ति भी की
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी

