धनतेरस जैन दर्शन में धन्य तेरस के रूप में मनाई जाती है
दीपावली का त्यौहार आ चुका है। जो पांच दिन तक मनाया जाता है। जिसकी शुरुआत धन तेरस से होती है।
लेकिन जैन दर्शन मे इसे धन्यतेरस के रूप में मनाया जाता क्योकि प्रभु महावीर ने इस दिन योग निरोध शुरू किया तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। अनेक लोगो ने इसे स्वर्ण की वस्तए खरीदने को विशेष मान्यता देता है लेकिन जैन दर्शन ऐसा नहीं

इस दिवस पर दीपावली के पूर्व कार्तिक त्रयोदशी के दिन भगवान महावीर ने बाह्य समवसरण लक्ष्मी का त्याग कर मन-वचन और काय को स्थिर किया और परम ध्यानमय हो गए प्रभु महावीर के योग निरोध के कारण यह तेरस धन्य हो गई।

यह तेरस धन्य-तेरस के नाम से जानी गई। हम सभी इस पावन दिवस को भगवान महावीर स्वामी के द्वारा योग निरोध को धारण कर संसार सागर से तिरने की यात्रा का मनन करते हुए मनाए, हमें भविष्य में स्वात्म कल्याण की प्रेरणा की ओर अग्रसर होना चाहिए

ताकि ,इस मार्ग पर चलते हुए पुरुषार्थ करते रहे एवं निकट भव में मोक्ष लक्ष्मी प्राप्त होवे यही हमारे जन्म की सफलता का धोतक होगा आगम मे उल्लेख है की मनुष्य जीवन मे ही संयम,तप और ध्यान हो सकता है।
संकलित जानकारी अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
