खान-पान बिगड़ने से आजकल विपरीत परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं अजित सागर महाराज
सागर
पूज्य मुनि श्री 108 अजीत सागर महाराज ने आज की वर्तमान खान पीन की दशा पर करारा प्रहार किया और उन्होंने कहा कि आज की स्थिति में व्यक्ति जन्म से मरण तक बोतल का ही प्रयोग कर रहा है।
उन्होंने करारा कटाक्ष करते हुए कहा कि जब बालक गर्भ में आता है तो मां की कमजोरी की वजह से उसको बोतल लगानी पड़ती है। बच्चों के दूध पीने के लिए बोतल का उपयोग होता है। उन्होंने पैक खाद्य सामग्री पर भी करारा कटाक्ष करते हुए कहा कि आज के बच्चे वह आज की युवा पीढ़ी पैक्ड पानी बोतल में भरा पानी पी रहे हैं। जवान बोतल से लेकर बीयर शराब आदि पी रहे हैं। इसके विपरीत बुढ़ापे की अवस्था में भी अस्पताल पहुंचने पर बोतल का उपयोग होता है।

पुराने समय की बात को स्मृति में लाते हुए महाराज श्री ने कहा कि पहले जब बच्चा पैदा होता था तो लकड़ी का उपयोग होता था और जीवन के अंत तक लकड़ी चलती थी। सब कुछ गलत खान पीन के कारण आज विपरीत स्थितियां प्रकट हो रही है। ठंडा पानी पी लेने से प्यास और ज्यादा लगती है जबकि प्यास बुझती नहीं है। उन्होंने सीख देते हुए कहा कि ज्यादा लंबे समय तक रखा पानी और खाने पीने के सामान बहुत ज्यादा हानिकारक हो जाते हैं। फिर भी लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने उपाय बताते हुए कहा कि खाना खा लेने के उपरांत यदि गुड़ खाया जाता है तो पित्त दूर होता है। गरम पानी पीने की सलाह देते हुए कहा कि गरम पानी अमृत का कार्य करता है। इसी के साथ पानी में गुड घोलकर कर और नींबू पानी मिलाकर पीने से अमृत का काम करता है। जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
बाहर के खाने के विषय में महाराज श्री ने कहा कि बाहर ज्यादा खाना-पीना करने से कैंसर रोग की उत्पत्ति ज्यादा हो रही है। इसका यह परिणाम यह सामने आता है कि इससे कैल्शियम की कमी होती है।

पुरानी परिस्थितियों के विषय में महाराज जी ने कहा कि पहले की महिलाएं बीमार कम हुआ करती थी। उसका कारण यह था कि पहले की महिलाएं 5:00 बजे उठकर घर के सारे कार्य करती थी। लेकिन आज की स्थिति बदलाव की ओर है। आज की महिलाएं दूसरों पर आश्रित है। इसी के कारण ज्यादा बीमार हो रही हैं। गैस का ज्यादा उपयोग भोजन बनाने के लिए हो रहा है। गैस के कारण ही कैंसर की संभावनाएं बढ़ी हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
