जिस स्थान पर आचार्य विद्यासागर महाराज के चरण पडे हो वो जैल नही जिनालय होता है विरंजन साग़र महाराज साग़र

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जिस स्थान पर आचार्य विद्यासागर महाराज के चरण पडे हो वो जैल नही जिनालय होता है विरंजन साग़र महाराज
साग़र

 

 

पुज्य जनसन्त विरंजन साग़र महाराज का संघ केंद्रीय जैल में आगमन हुआ। उनकी आगवानी की गई। ब्रह्मचारी रेखा दीदी, व डाक्टर नीलम जैन के सार्थक प्रयास से पुज्य मुनि श्री के प्रवचन हुए। इस अवसर पर डॉक्टर अमित जैन, राजा भैया, कविवर अखिल जैन, संतोष बिलहरा, अखिल जैन, मनीष जैन, अरुण जैन, रश्मि, ऋतु, अरविंद, रवि, अशोक पिडरूहा सुनील पड़वार राहुल पंडेले की मौजूदगी रही व उनकी आगवानी की

 

जब पूज्य मुनि श्री ने अपना उद्बोधन दिया तो बंदियों की आंखे करुणा से भर गयी। महाराज श्री ने कहा दुनिया सन्तो से मिलने आती है, आज के दिन सन्त आपसे मिलने आए है। उन्होंने आचार्य भगवंत विद्यासागर महाराज का जिक्र करते हुए कहा की वह जगह कैसे खराब हो सकती है जिस जगह आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के चरण पढ़े हो। वह जगह तो जेल नहीं जिनालय हो जाते हैं। केंद्रीय कारावास में बंदियों को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि आज के दिन आप और मैं दोनों कारावास में हैं अंतर बस केवल है आपको लाया गया है लेकिन मुझे बुलवाया गया है।
राम हनुमान से मिले थे उसी तरह मिलने आया हु
उन्होंने कहा कि मैं ठीक उसी तरह से मिलने आया हूं जैसे श्री राम प्रभु हनुमान से मिले थे और श्री कृष्ण सुदामा से मिले थे करुणामयी वचनों को सुन वातावरण भाव विभोर था आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज का जिक्र करते हुए मुनि श्री ने कहा कि जिस स्थान को गुरुवर के चरणों की आशीष प्राप्त हो वह स्थान तो तीर्थ के समान है। आगे बोलते हुए कहा आज इस स्थान संत भी हैं, जेलर भी हैं,सिपाही भी हैं। उन्होंने सन्त औऱ सिपाही में अंतर बताते हुए कहा कि सिपाही तो आपको प्रहार के द्वारा समझाता है, और संत प्यार से समझाता है।लेकिन संत और सिपाही में मात्र उद्देश्य एक ही होता है। सिपाही दनादन करते हैं लेकिन संत तो परिवर्तन कर देते हैं। उन्होंने कहा हर आदमी में परमात्मा बनने की शक्ति विद्यमान होती है चाहे वह नन्हीं चींटी ही क्यों ना हो उन्होंने जोर देते हुए कहा जब नन्ही चींटी अपना कल्याण कर पाती है तो हम क्यों नहीं? ,सीख देते हुए कहा जो हुआ है उसे भूल जाइए, यह सब पाप कर्म के उदय से हुआ है। और अपनी जिंदगी को सुधार कर अच्छा जीवन जिये। आचार्य गुरुवर का आशीष आप पर सदा है।

भावुक हृदय से बोलते हुए गुरुदेव ने कहा कि आपको घर परिवार की याद तो आती होगी। पर क्रोध के क्षणिक आवेश में जो हुआ है अब उसे भूल जाएं। और संकल्प लें कि आगे प्रभु की भक्ति कर हम सत्य मार्ग को चुनेंगे। इस स्थान पर सभी जाति वर्ग के लोग एक साथ रहकर भक्ति भाव के साथ परिवार की तरह रहते हैं निश्चित ही नहीं अपितु यह तीर्थ नही महातीर्थ है उदाहरण देते हैं कहा की यदि यह जगह खराब होती तो श्री कृष्ण जन्म लेते क्या?
हथकरघा के लिए कहा
यह आपके सुधार आगे के जीवन के लिए आचार्य गुरुदेव की आशीष और प्रयासों से हथकरघा उद्योग चल रहा है। इसीलिए यह जेल नहीं सुधार ग्रह है। जिस दिन मानव का मन परिवर्तन की राह पर आ जाता है उस दिन मानव को परमात्मा भी स्वीकार कर लेता है। इस कारवास में णमोकार महामंत्र की ध्वनि गुंजायमान होती
है। यहाँ सन्तो के आशीष चरण पढ़ते रहते हैं। संतो के चरण आपके आचरण कैसे ना बदलेंगे।
उन्होनें कहा पहले जो तन से हुआ है, उसे भूल जाएं अपने मन को सुधार लेना। और आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की वाणी वचनों को आत्मसात कर लेना।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

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