मानवता के मुख्य संरक्षक थे भगवान महावीर–न्याय मूर्ति एन के जैन**प्रकृति की गोंद में बसा सुरम्य तीर्थ है थूबोनजी–न्याय मूर्ति महतानी

अशोक नगर —
मानवता के लिए भगवान महावीर स्वामी के सन्देश आज भी उतनें ही उपयोगी है जो उन्होंने ढ़ाई हजार वर्ष पूर्व दिये थे।उनकी की दृष्टि बहुत सूक्ष्म थी। छोटे से छोटे जीवों का वहां संरक्षण होता है, जिसे हम प्रकृति समझते हैं।उसमें भी भगवान महावीर जीव राशि को देखते हैं। और उन्हें बचाते हुए जीवन जीने का अधिकार देते हैं।आज दुनिया में मानवीय मूल्यों का हास हों रहा है,ऐसे में हम सभी को मानवीय मूल्यों के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है।

यह विचार मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री एन के जैन ने दर्शनोदय तीर्थ में अपने सम्मान में आयोजित समारोह में व्यक्त किए
इसके पहले दर्शनोदय तीर्थ थूबोनजी के खड़े बाबा के दरबार में कमेटी के महामंत्री विपिन सिघई संरक्षण प्रचार मंत्री विजय धुर्रा संजीव भारिल्य ने न्याय मूर्ति श्री जैन व आयोग के सदस्य श्री ममतानी का साल श्री फल बड़े बाबा के विशाल चित्र को भेंट कर सम्मानित किया।
*सिक्किम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं जैन–विजय धुर्रा*
इस दौरान मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि न्याय मूर्ति श्री एन के जैन जयपुर हाईकोर्ट में रहें इसके बाद आपको सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवाये दी इसके वाद सिक्किम मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष सेवा देने वाले श्री अभी मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं वहीं श्री मनोहर ममतानी आयोग के सदस्य के रूप में हमारे निवेदन पर पधारे हैं आप परम पूज्य मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के परम भक्तों में है। अनेक अवसरों पर निवेदन के वाद आज हमारे बीच पधारें है।मानव अधिकार आयोग के सदस्य मनोहर ममतानी ने कहा कि थूबोनजी का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है विजय धुर्रा जी का बहुत दिनों से थूवोनजी आने के लिए आग्रह था जितना उन्होंने बताया था उससे कहीं अधिक देखने को मिला। यहां आकर असीम शांति का अहसास सहज ही महसूस किया जा सकता है। हमारे ऋषि मनीषियों ने इन तीर्थों पर तपस्या करके हमें जीवन जीने की कला सिखाई है यदि हम ऋषि वाणी को अपना ले तो बहुत सी परेशानी से बच सकते हैं।
*तीर्थ के इतिहास से अवगत कराया*
कमेटी के महामंत्री विपिन सिघई ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि दर्शनोदय तीर्थ अभी शेशव अवस्था में है। यहां विकास की खूब सम्भावनाये है।हम सब परम पूज्य मुनिपुंगव श्रीसुधासागर जी महाराज के निर्देशन में काम कर रहे हैं। इस तीर्थ को हराभरा बनाने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है। यहां तीर्थ पथरीली भूमि पर होने के कारण इसे विकसित करने में अधिक संसाधनो की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस दौरान सभी ने तीर्थ की वंदना की व क्षेत्र का भ्रमण कर तीर्थ के इतिहास को जानते हुए इसके पुरातन इतिहास की जानकारी प्राप्त की।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
