जो हमारी भक्ति तप पूजन आदि में बाधक हो वह सारी चीज कषाय है! स्वस्ति भूषण माताजी

धर्म

जो हमारी भक्ति तप पूजन आदि में बाधक हो वह सारी चीज कषाय है! स्वस्ति भूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी ने कषाय के विषय में प्रकाश डाला माताजी ने कहा कि हास्य रति अरति भय यानि भयभीत होना! जो आत्मा को कसे उसे कहते हैं कषाय! भय के माध्यम से आत्मा जो करना चाहती है जैसे ध्यान पूजा तप भक्ति आदि नहीं कर पाती है! इसीलिए भय को भी कषाय कहा है!

 

 

उन्होंने कहा की जो हमारी भक्ति तप पूजन आदि में बाधक हो वह सारी चीज कषाय है! भय के सात भेद बताये हैं! इहलोए भय परलोए भय मरण भय वेदना भय अकस्मात भय अरक्षा भय अगुप्ति भय! सम्यकदृष्टि जो होता है वह इन सात भयों से मुक्त होता है! अनुशासन के लिए भय जरुरी है! अगर भय ना हो तो अनुशासन का पालन भी ना हो! कहने का अभिप्राय यह है कि अगर पाप का भय है तो इंसान पाप करने से डरेगा! संसार शरीर और भोगों से भय होना चाहिए! संसार अर्थात मोह शरीर जिसके साथ हम रहते हैं और भोग यानि पांचो इन्द्रियों से संबधित विषय!
विषय शब्द प्रयोग किया है विष में य लग गया! विषय विष के समान होते है!विष तो एक बार ही शरीर को मारता है!लेकिन विषय आत्मा को मरते हैं आत्मा को कष्ट देते हैं! हमें लगता है कि ये विषय सुखी कर रहे हैं! लेकिन सत्य तो यही है कि विषय बहुत कष्टदायी होते है!जितना मोह कम है उतना भय भी कम है! धन से मोह है तो भय है कहीं कोई ले ना जाये कोई चुरा ना ले! जिसे धन से मोह नहीं है उसे भय भी नहीं है!

 

 

 

सम्यकदृष्टि विचार करता है कि धन रुपया पैसा मेरा नहीं है यह सब तो यहीं प्राप्त हुआ और यहीं रह जायेगा! आज मेरे पास है कल किसी और के पास था और आगे किसी और के पास रहेगा! धन का उपयोग मोह सहित करोगे तो भय रहेगा! मोह रहित करोगे तो भय नहीं रहेगा! जितनी जितनी चीजों का मोह होगा उतनी उतनी चीजों का भय होगा! हमेशा भय रहता है मुझे कोई बीमारी ना हो जाये

 

 

 

इसको बोलते हैं वेदना भय! सम्यक दृष्टि धन शरीर आदि को अपने से अलग मानता है! इसलिए वह विचार करता है कि जो मेरा है वह कोई ले नहीं सकता! और जो ले सकता है वह मेरा है ही नहीं!

चेतन जैन केशवराय पाटन से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *