गणिनी आर्यिका भरतेश्वर मति माताजी ससंघ का सानिध्य- आचार्य श्री विमल सागर महाराज की जन्म जयंती धूमधाम से मनाई

धर्म

गणिनी आर्यिका भरतेश्वर मति माताजी ससंघ का सानिध्य-
आचार्य श्री विमल सागर महाराज की जन्म जयंती धूमधाम से मनाई

जयपुर

 

 

 

-दुर्गापुरा स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर चन्द्रप्रभ में गणिनी आर्यिका श्री 105 भरतेश्वरमति माताजी ससंघ के सानिध्य में वात्सल्य रत्नाकर परम पूज्य आचार्य श्री 108 विमल सागर महा मुनिराज की 107वीं जन्म जयंती दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रकाश चन्द जैन चांदवाड़ एवं मंत्री राजेन्द्र कुमार जैन काला ने बताया कि इस अवसर पर आचार्य श्री की मण्डल विधान पूजा संगीत के साथ विधानाचार्य पं दीपक शास्त्री द्वारा करवाईं गई।
इससे पूर्व प्रातः 7.15 बजे मंदिर जी के पांडाल में आचार्य श्री के चरण चिन्हों पर अभिषेक व शांतिधारा की गई। शांति धारा करने एवं आचार्य विमल सागर मण्डल विधान पूजा में सौधर्म इन्द्र इन्र्दाणी का पुण्यार्जन राम चन्द्र ऊषा जैन सर्राफ ने प्राप्त किया। आचार्य श्री की पूजा में श्रद्धालुओं ने सजे हुए अष्ट द्रव्य भक्ति भाव से नृत्य करते हुए प्रत्येक मंत्र पर अलग अलग परिवार जनों ने स्थापना के बाद अलग अलग संगीत की स्वर लहरियों में अलग अलग द्रव्य समर्पित किये। जयमाल का अर्घ्य श्योपुर, प्रताप नगर, चित्रकूंट, तारों की कूंट आदि से पधारे एवं दुर्गापुरा के भक्तों ने भक्ति भाव से समर्पित किया। आचार्य श्री भरत सागर महाराज एवं गुरु मां को पुण्यार्जक परिवारजनों ने बड़े भक्ति भाव से अर्घ्य चढ़ाये।

कार्यक्रम में हुई विनयांजलि सभा में पंडित चन्दन मल अजमेरा, भाग चन्द जैन बाकलीवाल मित्रपुरा, श्रीमती चंदा सेठी, श्रीमती रेखा पाटनी ने आचार्य श्री के संस्मरण सुनाते हुए कहा कि आचार्य श्री प्राणी मात्र के कल्याण के लिए जीवन भर समर्पित रहे। गणिनी आर्यिका श्री के आशीर्वचन से पूर्व ट्रस्ट के मंत्री ने आचार्य विमल सागर महाराज पर आधारित प्रश्नोत्तरी के परिणाम घोषित किये। विजेताओं को पुरस्कृत किया तथा माताजी ने सभी को आशीर्वाद दिया।

 

आचार्य श्री एक महान संत, निमित्त ज्ञानी व शिरोमणि थे। भरतेश्वरमति माताजी

गणिनी आर्यिका श्री ने आशीर्वचन में बताया कि आचार्य श्री संसार से विरक्त होकर मोक्ष यात्रा की ओर बढ़े तो उन्हें कई प्रतिकूलताओं का सामना करना पड़ा। आचार्य श्री एक महान संत, निमित्त ज्ञानी व शिरोमणि थे। सम्मेद शिखरजी में आचार्य श्री के समाधि स्थल पर ध्यान लगाने से प्राणी मात्र को शांति प्राप्त होती है। सेठ ऋषभ चंद जैन आचार्य श्री के अनन्य भक्त थे। गुरु मां ने कार्यक्रम में सौधर्म इन्द्र इन्र्दाणी एवं शांति धारा करने वाले राम चन्द्र – ऊषा जैन सर्राफ को, विधान पूजा में बैठे श्रद्धालुओं को, बाहर से आए सभी भक्तों को, स्थानीय श्रद्धालुओं सहित उपस्थित सभी भक्त जनों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
ट्रस्ट की ओर से सांस्कृतिक मंत्री रेखा पाटनी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

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