2 अक्टूबर, पथरिया का दिन… और एक ऐसा दृश्य, जिसने हजारों दिलों को भिगो दिया24 वर्षीय आदीश जैन (टेहरका)ने पट्टाचार्य मुनिश्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में प्रथम केशलौंच कर मोक्षपथ पर कदम बढ़ाया।

धर्म

को2 अक्टूबर, पथरिया का दिन… और एक ऐसा दृश्य, जिसने हजारों दिलों को भिगो दिया24 वर्षीय आदीश जैन (टेहरका)ने पट्टाचार्य मुनिश्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में प्रथम केशलौंच कर मोक्षपथ पर कदम बढ़ाया।

पथरिया

2 अक्टूबर, पथरिया का दिन… और एक ऐसा दृश्य, जिसने हजारों दिलों को भिगो दिया24 वर्षीय आदीश जैन (टेहरका)ने पट्टाचार्य मुनिश्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में प्रथम केशलौंच कर मोक्षपथ पर कदम बढ़ाया।

 

 

 

यह वैराग्य का बीज कहां अंकुरित हुआ? उस भूमि पर, जहां से पिछले कई वर्षों से त्याग, तपस्या और मोक्ष की साधना के फूल खिल रहे हैं – “श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर”आदीश ने वहीं से शास्त्री स्नातक की उपाधि हासिल की। संस्थान में मिले संस्कारों ने उनके हृदय को भीतर तक झकझोरा। चार वर्षों तक वे संघ की सेवा में रहे, आहार-विहार कराए और धर्म की साधना को आत्मसात किया। 2024 में उन्हें मुनिश्री समत्व सागर जी महाराज के सानिध्य का अवसर मिला। और अब, वही संस्कार, वही साधना उन्हें मुनि दीक्षा के पथ पर ले आई।

 

 

 

कल जब अशोकनगर में इंजीनियर पीयूष जैन ने 54 लाख का पैकेज छोड़कर संघ में प्रवेश किया, ठीक उसी दिन सांगानेर का यह संस्कारित शिष्य आदीश भी केशलौंच कर वैराग्य की राह पर बढ़ा।

 

 

 

 

 

 

यह केवल संयोग नहीं था – यह संकेत था कि संस्कारों के दो उद्यान – “श्रमण संस्कृति संस्थान और श्रावक संस्कार शिविर” – निरंतर मोक्ष रूपी फल दे रहे हैं।’श्रमण शिरोमणि, मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने समाज को यह दो अनमोल धरोहरें दी हैं। उनके ये उपवन आने वाले युग में भी वैराग्य, तप और त्याग के फूल खिलाते रहेंगे।

 

 

 

 

आज जब आदीश ने केशलौंच किया, तो पांडाल में बैठा हर साधक भाव-विह्ल हो उठा। आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली। मानो किसी परिवार का इकलौता लाल सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर सच्चे आनंद की ओर बढ़ रहा हो।

 

 

 

 

 

_आदीश का यह कदम सिर्फ उनका व्यक्तिगत निर्णय नहीं है – यह संस्कारों की जीत है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि सही शिक्षा, सही वातावरण और सही गुरु का सानिध्य मिले, तो युवा भी मोह-माया छोड़ अमर पथ चुन सकते हैं।_

 

 

 

 

आज समाज एक स्वर से कह रहा है  गुरुदेव! श्रमण संस्कृति संस्थान के ये उपकार हम जन्म-जन्म तक नहीं भूलेंगे।”जगतपूज्य, निर्यापक श्रमण, श्रमण शिरोमणि मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के चरणों में कोटिशः नमोस्तु।

 

रवि जैन, पत्रकार

9926584999 प्राप्त आलेख संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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