मुनि श्री विनतनंदी महाराज की सलेखना पूर्वक समाधी देह पंचतत्व मे विलीन

धर्म

मुनि श्री विनीतनंदी महाराज की सलेखना पूर्वक समाधी देह पंचतत्व मे विलीन

डिग्गी‎

अग्रवाल सेवा सदन मे चातुर्मास रत आचार्य प्रवर 108  इंद्रनंदी महाराज के‎ संघस्थ मुनि विनतनंदी महाराज‎ का शुक्रवार रात को संल्लेखना‎ समाधिपूर्वक होकर देवलोकगमन‎ हुआ जैन दर्शन मे समाधी सलेखना का विशेष महत्व है  शनिवार को सुबह 9 बजे‎ उनकी अंतिम यात्रा की अग्रवाल‎ सेवा सदन से जयजयकारो की गूंज के बीच बैड बाजों‎ के साथ चकडोल यात्रा निकाली‎ गई। यह  चकडोल यात्रा सेवा सदन की‎ परिक्रमा करते हुए सेवा सदन के‎ पीछे समाधीस्थल पहुंची। जहां सभी‎ धार्मिक क्रियाओं के साथ मुनि‎ विनित नंदी की देह पंचतत्व में‎ विलीन हुई।‎ मुनि श्री  के

गृहस्थावस्था के‎ परिवारजनों द्वारा  मुखाग्रि दी गई।  इस बेला मे मोजूद जन णमोकार मंत्र‎ का वाचन करते‎ रहे।

दूर दराज से आए भक्तो  इस पुनीत कार्य मे सम्मलित हुए जैन दर्शन मे समाधी पूर्वक मरण उत्तम मरण माना गया साधू के जीवन का लक्ष्य यही है जीवन के अंतिम क्षण इस नश्वर देह को त्याग कर चारो प्रकार के आहार का त्याग कर शरीर को छोड़ समस्त प्रकार का त्याग कर समाधी की और अग्रसर होकर पंचम गति की और रमण हो वह समाधी और उत्तम है जब संत की निश्रा मे यह समाधी हो हर कोई श्रावक् संत यही  भावना भाता है

तेरी छत्र छाया भगवन मेरे सर पर होय

मेरा अंतिम मरण समाधी तेरे दर पर होय

अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *