जिंदगी तो पानी के बुलबुले के समान, फूटने पर रोना क्या: विद्यासागर महाराज
मल्हानवाड़ा
28 जून 2019 की सुबह आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का नगर आगमन हुआ था । जहा आगवानी एवं दर्शन के लिए सैकड़ों लोग माैजूद रहे थे। हो क्यों न लगभग 20 साल बाद महाराज जी ने पुनः नगर में अपने चरण रखे थे । पूज्य आचार्य श्री ने एक गांव के सेठ जी के अस्वस्थ बेटा पर कथा सुनाते हुए समाज को संतोष रखने का उपदेश दिया । उन्होंने कहा कि आप हम के करने कुछ नहीं होता जो कर्म किए है उसी का फल भोगना पड़ेगा। बच्चे पानी के बुलबुलों से खेलते हैं बुलबुल फूटने पर हंसते है। हमारे जीवन में भी बुलबुले के प्रकार से हवा भारी है। इस पर ज्यादा चिंतन न करते हुए सच्ची भावना से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन करना चाहिए। इसी में संतोष है। वही पावन बेला मे जबलपुर में निर्माण हो रहे 200 बिस्तर वाले पूर्णायु आयुर्वेदिक चिकित्सालय, गुरुकुल, प्रकल्प आदि के लिए करीब 40 लाख रुपये की सहयोग राशि एकत्रित हुई थी । साथ ही महाराज जी के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्तगण पहुंचे थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
