सुधासागर महाराज ने कहा कभी भी अपनी जिंदगी में मां की दृष्टि में अपराधी मत बनना, उनका हाथ सदा आशीर्वाद के लिए उठता है।
सागर
पूज्य मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने केन्द्रीय जेल सागर मे अपना उद्बोधन दिया केदियो को कहा अगर तुम्हारी जिंदगी के लिए अगर कोई सोचता है वह और कोई नहीं है, वह संत आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महाराज है। इस पर विशेष जिक्र करते हुए कहा उन्होंने आपके लिए हथकरघा खुलवाया।भावुक उदगार के साथ कहा आप यहां पर जेल में सुखी है परंतु आपके परिवार पर आपके वहां न रहने से क्या बीत रही है, यह आपने कभी सोचा है क्या। य उन्होंने कहा कि जिंदगी का मूल्य समझने की बात को कहा मर्मस्पर्शी भाव के साथ मुनि श्री ने ध्यान इंगित करते कहा कभी भी अपनी जिंदगी में मां की दृष्टि में अपराधी मत बनना, उनका हाथ सदा आशीर्वाद के लिए उठता है। यदि तुमको माता-पिता द्वारा अपराधी मान लिया गयातो समझ जाना जिंदगी में अब अंधेरा होने वाला है।
देश की संस्कृति पर विशेष बात करते हुए उन्होने कहा जो हमारे देश की संस्कृति मिटाते है, घुसपैठ करते है, देश का नुकसान करते है उनके लिए जेल बनाई गई थी। तुम सब भारत माता के बेटे हो हमेशा पाप करने से पहले सोचना चाहिए। हम कभी अपनी भारत मां की जेल में नहीं जाएगे। मां के द्वारा बनाई गई जेल में बेटा है इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है। कानून को धर्म ने बनाया है और धर्म के मंदिर में हम अपराधी है। मंदिर में यदि हम अपराधी बन कर जाएं बहुत बड़ा पाप है। मंदिर में पवित्रता के साथ जाना चाहिए।
पश्चाताप का मंत्र देकर जा रहा हूं। मुनि श्री
अंत मे मुनि श्री ने कहा आज जैल मे एक बहुत बड़ा पश्चाताप का मंत्र देकर जा रहा हूं। अपराध की सजा काटते समय कभी कोई अपराध नहीं करना। वही जैल मे पहुचने पर जेल अधीक्षक राकेश भांगरे एवं अन्य अधिकारियों का ब्रह्मचारिणी रेखा दीदी ने परिचय कराया। वही कैदियों ने मुनि संघ का पाद प्रक्षालन किया। साथ ही मुनि संघ ने जेल में चल रहे हथकरधा केंद्र का अवलोकन किया व कैदियों से भी चर्चा की। वही पूज्य संघ का जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम जेल में हुआ। जिज्ञासा समाधान की एक विशेष बात रही कई कैदियों ने अपराध से संदर्भित प्रश्न मुनि महाराज से किए जिसे महाराज ने धार्मिक रूप से उन्हें उत्तर के माध्यम से अपराध न करने का संकल्प दिलाया।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी
