श्री वर्द्धमान चले श्री वर्द्धमान महावीर की ओर रत्नत्रय के प्रतीक तीसरी बार होगा मंगल प्रवेश

धर्म

 श्री वर्द्धमान चले श्री वर्द्धमान महावीर की ओर रत्नत्रय के प्रतीक तीसरी बार होगा मंगल प्रवेश

श्री यशवंत जन्म सन 1950 से मुनि दीक्षा 1969  से आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी सन 1990 से   श्री महावीर जी मे आचार्य श्री वर्द्धमान सागर 9 जनवरी 1999अब 2022 में शुभागमन इसके लिए हमे इतिहास की ओर वापस लौटना होगा सन 1968 में सनावद श्रेष्ठि श्री कमलचंद जी एवम श्रीमती मनोरमा जी के 8 पुत्रों एवम 4 पुत्रियों का अल्प आयु में निधन हो गया था रिश्तेदारों परिजनों की सलाह अनुसार गर्भस्थ 13 वी संतान की लंबी आयु के लिए माता पिता प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी दिगम्बर जैन मंदिर जाते है तथा श्री महावीर स्वामी की प्रतिमा की 108 परिक्रमा लगाते है मंदिर की दीवाल पर उल्टे स्वस्तिक बनाते है तथा बाल मुंडन कराने का संकल्प लेते है  मेरी कल्पना है कि जैसे यह गर्भ कल्याणक की क्रिया हो रही हो

 

13 का अशुभ अंक शुभ बना जन्म महोत्सव

पर्युषण पर्व के पावन आर्जव धर्म तृतीय दिवस  भाद्र शुक्ला सप्तमी तिथि18 सितम्बर सन 1950  को श्रीमती मनोरमा देवी श्री कमलचंद जी पंचोलिया सनावद के यहाँ 13 वी संतान का जन्म होता है नाम श्री यशवंत रखा जाता है  ।मेरी कल्पना अनुसार यह जन्म कल्याणक  प्रतीत होता है19 वर्ष की उम्र में  मुनि दीक्षा युवा बाल ब्रह्मचारी श्री यशवंत जी दितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी को मुनि दीक्षा हेतु श्रीफल अर्पित कर निवेदन करते है तथा गुरुदेव की आज्ञा पालन में श्री सम्मेद शिखर जी की यात्रा पर जाते है और अचानक आचार्य श्री शिव सागर जी की समाधि होने से नूतन आचार्य एवम तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी बनाये जाते है

आचार्य पदारोहण पर 11 दीक्षाएं

 

 

24 फरवरी सन 1969 फागुन शुक्ला अष्टमी  को तृतीय पट्टा धीश आचार्य श्री धर्म सागर जी 11 दीक्षाएं देते है । इनमें 6 मुनि दीक्षा 2 आर्यिका 2 क्षुल्लक तथा 1 क्षुल्लिका दीक्षा देते है ।तीर्थंकरों के 4 नाम पर नामकरणब्रह्चारी श्री यशवंत जी मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी बने।मुनि श्री  अभिनंदन सागर जी  मुनि श्री संभव सागर जी मुनि श्री शीतल सागर जी एवम मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी 4 नाम भगवान के नाम पर होते है। श्री महावीर जी दीक्षा स्थली का  अद्युत संयोग श्री वर्द्धमान सागर नामकरण से होता है।

बाल मुंडन की मन्नत

माता पिता ने जन्म के पूर्व मुंडन कराने की जो मन्नत ली थी वह मन्नत केश लोचन से पूर्ण हुईमेरी कल्पना अनुसार जैसे दीक्षा कल्याणक हुआ हो।

नेत्र ज्योति उपसर्ग

दीक्षा के 6 माह के भीतर जयपुर खनिया जी मे नेत्र ज्योति जाने के 49 धंटे बाद 3 धंटे शांति भक्ति का पाठ करने से नेत्र ज्योति बगैर डॉक्टरी इलाज के प्रभु भक्ति से वापस आई ।

श्री बाहुबली भगवान का महामस्तकाभिषेक

आपके प्रमुख सानिध्य एवम मार्गदर्शन में वर्ष 1993 वर्ष 2006 तथा वर्ष 2018 का महामस्तकाभिषेक 400 साधुओ की  उपस्तिथि सानिध्य में हुआ

9 जनवरी 1999 को दूसरी बार 30 वर्षो बाद प्रवेश

1969 में दीक्षा होने के 30 वर्षो के बाद यह संयोग बना कि 9 जनवरी 1999 को वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा हेतु दूसरी बार प्रवेश किया

आचार्य संघ की आगवानीप्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीर सागर जी की शिष्या  गणनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी ने की।

चार पीढ़ी मोजूद रही

प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी की परम्परा के  पूर्वाचार्यो के शिष्यों की गरिमामयी मोजुदगी रही आचार्य श्री वीरसागर जी की शिष्या आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी आचार्य श्री धर्म सागर जी के शिष्य स्वयम आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी एवम आर्यिका श्री शुभमती जी आचार्य श्री अजित सागर जी के शिष्य मुनि श्री चिन्मय सागर जी एवम आर्यिका श्री चैत्य मति जी एवम आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के अनेक शिष्य मौजूद रहेऐसा संयोग धरियावद  तथा जयपुर में भी हुआ जब दिव्तीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी की शिष्या आर्यिका श्री विशुद्ध मति जी सहित 5 पीढ़ी मोजूद रही

कोई गिरी नही कोई प्रोजेक्ट नही                                                                                               आपके नाम पर भारत देश मे किसी भी क्षेत्र नगर में कोई मंदिर क्षेत्र नही बनाया गया है क्योंकि आपका कोई  प्रोजेक्ट नही है।

53 वर्षो का संयम दीक्षा कालवर्तमान समय मे कुछ ही साधु परमेष्ठियों का साधु जीवन 50 वर्ष से अधिक है।

इन 53 वर्षो में 32 मुनि दीक्षा 33 आर्यिका दीक्षा  एक ऐलक 13 क्षुल्लक तथा 10 क्षुल्लिका दीक्षाएं सहित 89 दीक्षाएं आपने दी है। आपने 60 से अधिक पंच कल्याणक एवम साधुओं की सल्लेखना नियापकाचार्य रहते करवाई है

रत्नत्रय प्रतीक 3 तीसरी बार प्रवेश

सन 1969 सन 1999 के बाद अब सन 2022 में वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का मंगल प्रवेश होगा । इस प्रवेश ने असंभव लक्ष्य को संभव बना दिया क्योंकि  कोथली से विहार के बाद विहार के दौरान 4 समाधियां भी अनायास हुई।

24 का संयोग

24 वे तीर्थंकर भगवान् श्री महावीर स्वामी का महामस्तकाभिषेक होना है प्रमुख संघ सानिध्य नाम अनुरूप आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का रहेगा। पूर्व में वर्ष 1998 में आचार्य

संघ सानिध्य नाम अनुरूप आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का रहेगा। पूर्व में वर्ष 1998 में आचार्य श्री विद्यानंदी जी के सानिध्य मेंमहामस्तकाभिषेक हुआ था ।संयोगवश 12 वर्षीय महामस्तकाभिषेक अब 24 वर्षो बाद होने वाले महामस्तकाभिषेक के लिए संघ की संख्या भी  2 क्षुल्लक हटाने पर साधु परमेष्टि भी  24  है

24 फरवरी को दीक्षा हुई 24 जून को आचार्य पदारोहण हुआ।24  नवम्बर 22 से कार्यक्रम होगा।

श्री महावीर जी मे दीक्षाएं होगीअभी तक आपने 89 दीक्षाएं दी हैजो शतक के करीब है आचार्य श्री को अनेक श्रावक श्राविकाओं तथा संघस्थ भैया दीदियों ने दीक्षा हेतु श्रीफल चढ़ाए है किनकी लॉटरी खुलती है श्री महावीर जी चातुर्मास के दौरान दीक्षाएं होगी जिसमें साधना दीदी इंदौर की भी आर्यिका दीक्षा होनी है।

आचार्य श्री के जीवन परिचय को कम शब्दों में लिखना मुश्किल है

चाहे नेत्र ज्योति सहित अनेक उपसर्ग हो  वर्ष 1993 2006 तथा वर्ष 2018 का महामस्तकाभिषेक हो अनेक चमत्कारी  संस्मरण हो उपाधियां हो अनेक साधुओ से मिलन होअनेक राष्ट्रपति प्रधानमंत्री राज्यपाल मुख्यमंत्री ने आशीर्वाद लिया हो  अनेक धार्मिक विद्वत सम्मेलन हो आदि

आगवानी वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी की आगवानी गणनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी आर्यिका श्री सरस्वतिमती माताजी तथा अन्य संघ तथा अनेक राजनेतिक मंत्रीगण  सामाजिक धार्मिक पदाधिकारी गण आगवानी करेंगे

राजेश पंचोलिया इंदौर

वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार

संकलनकर्ता अभिषेक लुहाड़िया

रामगंजमंडी

 

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