स्मृति के झरोखे से गणिनी आर्यिका105 विशिष्ट मति माताजी व आर्यिका 105 विकर्षमती माताजी का अनुपम छायाचित्र

धर्म
  1. गणिनी आर्यिका105 विशिष्ट मति माताजी व आर्यिका 105 विकर्षमती माताजी का अनुपम छायाचित्र
यह पावन दृश्य यही सन्देश देता है हमारी गणिनी गुरु माँ विशुद्धमति माताजी जो स्वयं वात्सलय की प्रतिमूर्ति उन्ही के मार्ग का अनुसरण करते उन्ही की यह दो शिष्याएं सचमुच वात्सलय अंग और विनय सम्पन्नता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है
यह छायाचित्र अनुपम अविस्मरणीय है इसे जितना संजोया जाकर रखा जा सके कम है
यही कहूंगा
जिनधर्म का गौरव महान है
विशुद्धमति जी विशिष्टंमती जी जिनधर्म की शान है
आओ इनको वन्दन कर ले
यह चलती फिरती तीरथ है
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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