भगवान महावीर स्वामी के चरित्र पर आधारित त्रिदिवसीय ‘वीर कथा’ का आयोजन*
नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर।
आचार्य श्री सुनीलसागरजी गुरुदेव के सानिध्य में भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण महोत्सव के पावन अवसर पर उनके जीवन चरित्र, आदर्शों एवं सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से 7 से 9 नवंबर तक त्रिदिवसीय ‘वीर कथा’ का आयोजन किया गया ।
कथा के दौरान गुरुदेव ने धनतेरस के वास्तविक आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन केवल धन अर्जित करने का नहीं, बल्कि भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक की स्मृति में मनाया जाने वाला धन्य तेरस का पावन अवसर है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी के पीछे भागने वाले तो अनेक हैं, लेकिन वास्तविक लक्ष्मीपति तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जैसे विरले ही होते हैं।



गुरुदेव ने कहा कि दुनिया में धन बढ़े या न बढ़े, लेकिन ऐसी भावना अवश्य होनी चाहिए कि संसार में कोई भी व्यक्ति रोटी के लिए तरसे नहीं। आज धन्य तेरस को केवल धन की तेरस तक सीमित कर दिया गया है, जबकि इसका वास्तविक संदेश त्याग, करुणा और आत्मकल्याण से जुड़ा है।

उन्होंने भगवान महावीर स्वामी के वैराग्य एवं वीतरागता का वर्णन करते हुए बताया कि संसार की भौतिक संपदा और लक्ष्मी भी तीर्थंकर की आध्यात्मिक ऊँचाई को स्पर्श नहीं कर सकती। समवशरण में स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान होने के बावजूद भगवान की वीतरागता और निर्मलता सर्वोपरि रहती है।


गुरुदेव ने कहा कि जैन धर्म की महानता यही है कि यह प्रत्येक जीव को भगवान बनने का मार्ग दिखाता है। यहाँ किसी की जाति या सामाजिक स्थिति नहीं, बल्कि उसके भाव, पुरुषार्थ और आत्मशुद्धि का महत्व है। भील जैसे साधारण व्यक्ति को भी भगवान बनने का मार्ग दिखाने वाला जैन धर्म आत्मकल्याण की अनुपम परंपरा है।
त्रिदिवसीय वीर कथा के माध्यम से श्रद्धालु भगवान महावीर स्वामी के जीवन चरित्र, त्याग, तप, अहिंसा और वीतरागता के आदर्शों को आत्मसात कर रहे हैं।
माही जैन धीरावत पीपलखूंट प्रतापगढ़ से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
