डॉक्टर कल्याण गंगवाल पुणे की कलम से जीवदया – सबसे बड़ा धर्म, सबसे बड़ा पुण्य
इंसान होना सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। हमारे आसपास रहने वाले हर जीव को भी जीने का उतना ही अधिकार है, जितना हमें। किसी प्यासे पक्षी के लिए पानी रखना, किसी भूखे बेजुबान को रोटी खिलाना, 🐄 किसी घायल पशु की सेवा करना और 🐜 छोटे से छोटे जीव की रक्षा करना ही सच्ची जीवदया है।

याद रखिए…
बेजुबान बोल नहीं सकते, लेकिन दर्द उन्हें भी होता है। वे अपनी तकलीफ बता नहीं सकते, लेकिन महसूस जरूर करते हैं।
आइए, हम ऐसा संकल्प लें कि हमारी वजह से किसी जीव को तकलीफ न हो, बल्कि हमारे कारण किसी बेजुबान को नया जीवन मिले।
❤️ न किसी जीव को सताएं, न किसी को मरने दें। 🌿 जहां संभव हो, वहां जीवन बचाएं। 🙏 सेवा, करुणा और दया को अपने जीवन का संस्कार बनाएं।
क्योंकि मंदिर में दीप जलाना पुण्य है, लेकिन किसी बेजुबान के जीवन में उजाला करना महापुण्य है।
🌺 जीवदया अपनाएं – मानवता को सार्थक बनाएं। 🌺। प्राणी मित्र डॉ कल्याण गंगवाल ( पुणे)
