आर्यिका श्री जिनेश मति का निर्जल 11 उपवास से उत्कृष्ट समाधि मरण
सीकर
धनतेरस को धन्य तेरस बनाकर जिनेशमति माताजी ने मानव जीवन को किया सार्थक 7 नवंबर को होंगे अंतिम संस्कार तेरी छत्रछाया भगवन मेरे सिर पर हो मेरा अंतिम मरण समाधि तेरे दर पर हो ।मरण समय गुरु पाद मूल हो ,संत समूह रहे। जिनालयों में जिनवाणी की गंगा नित्य बहे, भव भव में संन्यास मरण हो नाथ माथ हाथ धर दो ।मेरा अंतिम मरण समाधि तेरे दर पर हो समाधि मरण की इन पवित्र भावनाओ को ह्रदय में धारण करके श्रावक ,श्राविका, श्रेष्ठ आचार्य संघ में दीक्षा ग्रहण कर मनुष्य जीवन सार्थक करते है। गौहाटी असम की श्रीमती विमला देवी काला गौहाटी ने जीवन की नश्वरता को समझ कर वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से पारसोला राजस्थान में 5 फरवरी 2024 को आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री जिनेश मति नामकरण हुआ । 6 नवंबर 2026 को धर्म नगरी सीकर राजस्थान में शाम को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्री मुख से अरिहंत, सिद्ध का उच्चारण सुनते हुए उत्तम समाधि मरण हुआ। इसके पूर्व आर्यिका श्री जिनेश मति ने यम सल्लेखना लेते समय आचार्य श्री , मुनिराजों ,आर्यिका माताजी ,परिजन,समाज से क्षमा याचना ले कर चारो प्रकार के आहार का त्याग किया ।दिनांक 7नवंबर को आपकी डोल विमान यात्रा पारस भवन दंग की नसिया से आचार्य श्री धर्म सागर समाधि स्थल के लिए पर प्रातः 8.30 बजे प्रारंभ होगी
एक परिचय 86 वर्षीय श्रीमती विमला देवी स्वर्गीय कंवरी लाल काला रेण नागौर निवासी प्रवासी गुवाहाटी ने भरे पूरे परिवार 5 पुत्रों 3 पुत्रियों के भरे पूरे परिवार की होकर वर्ष 2024 में आर्यिका दीक्षा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से अंगीकार की। गृहस्थ अवस्था से संयमी जीवन में हजारों उपवास किये। विगत माह सोलह कारण महा पर्व पर भी 16 उपवास किए 6 नवंबर को आचार्य संघ सानिध्य में धन तेरस को धन्य तेरस बना कर मनुष्य जीवन सार्थक किया। गृहस्थ अवस्था से आचार्य श्री धर्म सागर जी सहित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का मंगल आशीर्वाद परिवार पर फलीभूत हुआ। आपके परिजन गौहाटी, कोलकाता, हैदराबाद अमेरिका , विजय नगर आदि से विगत 1 माह से संघ की सेवा में लगातार रहे।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
