एक पक्ष को पूरा सत्य मानने से बचें, हर बात को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझें : आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी

धर्म

एक पक्ष को पूरा सत्य मानने से बचें, हर बात को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझें : आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी

 

केशवरायपाटन के अतिशय क्षेत्र में धर्मसभा, जैन दर्शन के माध्यम से विचारों में संतुलन और सत्य को समझने का दिया संदेश**

**केशवरायपाटन।**

 

किसी भी बात को केवल एक पक्ष से देखकर निष्कर्ष निकालना भ्रम का कारण बन सकता है। सत्य को सही अर्थों में समझने के लिए उसके विभिन्न पहलुओं को जानना और परिस्थितियों के अनुरूप विचार करना आवश्यक है। इसी महत्वपूर्ण संदेश के साथ आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने शुक्रवार को केशवरायपाटन स्थित अतिशय क्षेत्र में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को जैन दर्शन की गहन शिक्षाओं से अवगत कराया।

 

 

माताजी ने कहा कि प्रत्येक वस्तु और विषय को उसकी विशेषताओं, परिस्थितियों तथा विभिन्न दृष्टिकोणों के आधार पर समझना चाहिए। जब व्यक्ति किसी बात के केवल एक पक्ष को ही पूर्ण सत्य मान लेता है, तो उसकी समझ अधूरी रह सकती है। इसलिए किसी भी विषय पर निर्णय लेने से पहले उसके सभी पक्षों पर विचार करना जरूरी है।

### वचन, शब्द और भाषा का बताया महत्व

धर्मसभा में आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने जीव की विकास यात्रा में वचन, शब्द और भाषा की भूमिका को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि एक इंद्रिय जीवों में बोलने की क्षमता नहीं होती, जबकि दो इंद्रिय जीवों से वचन वर्गणा के संबंध की चर्चा प्रारंभ होती है। वचन की उपस्थिति और शब्दों का विकसित होना अलग-अलग अवस्थाएं हैं।

उन्होंने कहा कि अनेक जीव अपनी स्वाभाविक ध्वनियों के माध्यम से अभिव्यक्ति करते हैं, वहीं मनुष्य के जीवन में वचन, शब्द और भाषा विचारों को व्यक्त करने तथा आपसी संवाद स्थापित करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। भाषा के जरिए मनुष्य अपने अनुभव, ज्ञान और भावनाओं को दूसरों तक पहुंचाता है। इससे सीखने, समझने और ज्ञान के विस्तार के नए रास्ते खुलते हैं।

 

### संतुलित विचार ही सही समझ का आधार

माताजी की शिक्षाओं का सार यही रहा कि जीवन में विचारों का संतुलन बनाए रखना चाहिए। किसी भी विषय को एकांगी दृष्टि से देखने के बजाय उसके विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास करना चाहिए। जैन दर्शन का अनेकांत दृष्टिकोण भी यही प्रेरणा देता है कि सत्य को समझने के लिए अलग-अलग दृष्टिकोणों पर विचार करना आवश्यक है।

धर्मसभा में दिया गया यह संदेश जीवन के व्यवहार में भी महत्वपूर्ण है। यदि व्यक्ति दूसरों के विचारों को समझने का प्रयास करे और निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों पर विचार करे, तो आपसी मतभेदों को समझने तथा विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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