डॉ. आर.के. जैन को मिला ‘तीर्थ चक्रवर्ती सम्मान’, कोटा सहित संपूर्ण हाड़ौती गौरवान्वित
जैन तीर्थों के संरक्षण, संवर्धन और जीर्णोद्धार में उल्लेखनीय योगदान के लिए मथुरा में किया गया सम्मानित, उपलब्धि पर समाजजनों ने दी बधाई
*रामगंजमंडी।
* जैन तीर्थ क्षेत्रों के संरक्षण, संवर्धन एवं धार्मिक धरोहरों के उत्थान के लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रहे कोटा, राजस्थान के डॉ. आर.के. जैन को प्रतिष्ठित ‘तीर्थ चक्रवर्ती सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। उत्तर प्रदेश के मथुरा में आयोजित भारतीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के शतकोत्तर रजत जयंती समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। डॉ. जैन की इस उपलब्धि से कोटा सहित संपूर्ण हाड़ौती क्षेत्र गौरवान्वित हुआ है। सम्मान की खबर मिलते ही जैन समाज एवं शुभचिंतकों में हर्ष की लहर दौड़ गई और उन्हें बधाइयां देने का सिलसिला शुरू हो गया।
मथुरा में हुआ दो दिवसीय भव्य आयोजन
भारतीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी का दो दिवसीय समारोह 21 एवं 22 अक्टूबर को मथुरा में आयोजित हुआ। कमेटी की स्थापना वर्ष 1902 में इसके संस्थापक श्री माणकचंद जवेरी द्वारा मथुरा में ही की गई थी। बाद में वर्ष 1906 में कमेटी का कार्यालय मुंबई में प्रारंभ हुआ। संस्था की गौरवशाली यात्रा के इस विशेष अवसर पर तीर्थक्षेत्रों के विकास, संरक्षण-संवर्धन और जीर्णोद्धार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

समारोह के दौरान जैन तीर्थों के संरक्षण तथा धार्मिक कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों के कार्यों की सराहना की गई। इसी क्रम में डॉ. आर.के. जैन, कोटा को उनकी सक्रिय सहभागिता, कार्यनिष्ठा और तीर्थ संरक्षण के प्रति समर्पण के लिए ‘तीर्थ चक्रवर्ती सम्मान’ से अलंकृत किया गया।


जैन धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत
डॉ. आर.के. जैन जैन तीर्थों, धार्मिक स्थलों और प्राचीन विरासत के संरक्षण-संवर्धन एवं जीर्णोद्धार के लिए लंबे समय से प्रयासरत हैं। वे जैन तीर्थ वंदना, दर्शनीय स्थलों तथा जैन दिगंबर आचार्यों से संबंधित विषयों पर पुस्तकों सहित विभिन्न वैचारिक एवं धार्मिक पुस्तकों के लेखन कार्य में भी सक्रिय हैं। उनके प्रयास जैन समाज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

‘तीर्थ हम सबके हैं’ की भावना पर रहा जोर
समारोह का प्रमुख उद्देश्य यह भावना सुदृढ़ करना रहा कि जैन तीर्थ केवल किसी संस्था या उसके पदाधिकारियों की संपत्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज की साझा धरोहर हैं। इनके संरक्षण, संवर्धन और विकास की जिम्मेदारी भी समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है। इसी सामूहिक भावना के साथ तीर्थक्षेत्रों की प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।


डॉ. आर.के. जैन को मिले इस सम्मान को हाड़ौती क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। जैन समाज के लोगों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनके प्रयास भविष्य में भी जैन तीर्थों के संरक्षण और धार्मिक विरासत के संवर्धन को नई दिशा देंगे।
रिपोर्ट: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
