अतिशय क्षेत्र की वंदना करने से अपने जीवन में भी अतिशय होते हैं विमल सागर महाराज
बागीदौरा
रविवार की अनुपम बेला में पूज्य मुनि श्री विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री 108 विमल सागर महाराज ने कहा अवसर आते हैं चले जाते हैं, जो अवसर का लाभ नहीं लेता है वह रह जाता है। फिर दोबारा अवसर मिलना कठिन होता है।
उन्होंने तीर्थ वंदना का एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि देवपथ और खेवपथ ने श्री सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र पर ज्वार मकई के दाने चढ़ाए थे। जो जो अतिशय से मोती बन गए थे। महाराज श्री ने कहा कि अतिशय क्षेत्र की वंदना करने से अपने जीवन में भी अतिशय होते हैं।



जिननाथपुरम खुणादरी जिला उदयपुर में हजारों वर्षों के लिए मंदिर रहेगा। जिसकी जैसी योग्यता हो पात्र बनकर पंचकल्याणक में सहयोग देना है। उन्होंने कहा की पाठशाला में योगदान देने वालों को शुद्ध केवली पद की प्राप्ति होती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
