भक्ति और शांति से चित्त को भरें, लंकेश नहीं क्लेश का दहन करें : आचार्य श्री सुनीलसागरजी जी महाराज* 

धर्म

*भक्ति और शांति से चित्त को भरें, लंकेश नहीं क्लेश का दहन करें : आचार्य श्री सुनीलसागरजी जी महाराज*

 

नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर।

आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा विजयादशमी का पर्व बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का प्रतीक है। जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की, उसी प्रकार आचार्य श्री महावीरकीर्ति जी महाराज का आचार्य पदारोहण असंयम पर संयम की विजय का संदेश देता है। इस अवसर पर पूज्य आचार्य श्री ने जीवन में व्याप्त आंतरिक बुराइयों, अहंकार और कषायों को समाप्त करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि मनुष्य को अपने चित्त को भक्ति और शांति से भरना चाहिए तथा लंकेश का नहीं, बल्कि अपने भीतर के कलेश का दहन करना चाहिए।

 

 

 

उन्होंने कहा कि आज प्रश्न यह है कि किस रावण की कटु भुजाओं को काटें और किस लंका को आग लगाएं? जब घर-घर में रावण और पग-पग पर लंका दिखाई देती है, तो इतने राम कहां से लाएं? जब तक मनुष्य अपने भीतर छिपी बुराइयों को नहीं जलाता, अपने अहंकार को समाप्त नहीं करता और अपने विकारों पर विजय प्राप्त नहीं करता, तब तक रावण दहन का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। केवल पुतला जलाने से राख और प्रदूषण ही उत्पन्न होगा, लेकिन यदि भीतर का अहंकार और बुराइयां जल जाएं, तो जीवन में वास्तविक विजय का प्रकाश फैल सकता है।

पूज्य आचार्य श्री ने आत्मचिंतन की प्रेरणा देते हुए कहा कि दूसरों की बुराइयां देखने से पहले मनुष्य को अपने भीतर झांकना चाहिए। रावण का पुतला जलाने से पहले अपने अंदर मौजूद क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों को पहचानना आवश्यक है। सच्चा विजयादशमी पर्व वही है, जब मनुष्य अपने दोषों पर विजय प्राप्त कर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़े।

जैन शास्त्रों में रावण को भावी तीर्थंकर के रूप में वर्णित किया गया है। वह अपने वर्तमान जीवन में भी भगवान शांतिनाथ का परम भक्त माना जाता है। यह प्रसंग हमें प्रेरणा देता है कि किसी भी जीव के प्रति एकांगी दृष्टिकोण रखने के बजाय उसके गुणों, भक्ति और आध्यात्मिक संभावनाओं को समझना चाहिए।

 

विजयादशमी का वास्तविक संदेश बाहरी शत्रु का विनाश नहीं, बल्कि अपने भीतर के विकारों पर विजय प्राप्त करना है। भक्ति से चित्त को निर्मल बनाकर, शांति को जीवन में अपनाकर और संयम के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य सच्चे अर्थों में विजय प्राप्त कर सकता है।

 

माही जैन धीरावत पीपलखूंट प्रतापगढ़ से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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