मैं ही कर्ता हूं यह यह भावना छोड़कर उचित समय पर घर संसार छोड़ने का निर्णय लें।मुनिश्री श्रमण सागर जी 

धर्म

मैं ही कर्ता हूं यह यह भावना छोड़कर उचित समय पर घर संसार छोड़ने का निर्णय लें।मुनिश्री श्रमण सागर जी

राघौगढ़ में पिच्छिका परिवर्तन समारोह आगामी 1 नवंबर को।

राघौगढ़ 19 अक्टूबर।

आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, प्रवचन वाचस्पति, महान तपस्वी, विद्यागुरु कुल गौरव, बुन्देली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने सोमवार को विद्यासागर सभागार राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला के अंतर्गत “कर्ता पने की भावना से कैसे बचें” इस विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा वर्तमान में हर व्यक्ति जिस जिम्मेदारी को निभा रहा है उस जिम्मेदारी को मृत्यु पर्यंत तक नहीं छोड़ना चाहता है। परिवार में बुजुर्ग भी हो गए हैं तो भी यह भावना रहती है कि मैं जो कहूंगा वही होगा। मुनिराज ने कहा आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के गुरु आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने अपना आचार्य पद विद्यासागर जी महाराज को देकर उनके आचार्यत्व में मुनि रहकर शेष जीवन व्यतीत किया ,धर्म साधना कर आत्म कल्याण किया। इसी प्रकार आपने एक और उदाहरण देते हुए बताया जैन आचार्य देशभूषण जी महाराज ने प्राचीन जैन ग्रंथ भू वलय का हिंदी अनुवाद किया। उस ग्रंथ में लिखा प्राचीन काल में सुप्रसिद्ध जैन आचार्य वीर सेन स्वामी जी ने लगभग 45 वर्ष की उम्र में ही अपने शिष्य को आचार्य बनाकर संघ के संचालन की जिम्मेदारी दी थी।

 

 

 

 

आपने कहा यह दो ऐसे उदाहरण है जिनसे हमें यह प्रेरणा मिलती है कि घर परिवार एवं संसार से विरक्ति का निर्णय उचित समय पर लेना चाहिए। मुनिराज ने कहा दो भावनाएं हैं एक है जिसे हम हीन भावना कहते हैं अगर आपके मन में हीन भावना आए तो यह सोच लेना की आपसे भी ज्यादा अभावग्रस्त इस दुनिया में है। दूसरी भावना है प्रवीण भावना, इस भावना को हम स्वयं को सबसे बड़ा समझने की भावना कह सकते हैं। जिनके मन में यह प्रवीण भावना आती है तो उन्हें यह विचार करना चाहिए उनके ऊपर भी बहुत कुछ हैं। जो स्वयं को सबसे बड़ा समझ लेते हैं उनको यह विचार करना चाहिए।

 

 

मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने प्रवचन में आव्हान किया कर्ता पने के भाव को छोड़कर उचित समय पर परिवार एवं संसार से विरक्ति लेकर आत्म कल्याण की ओर बढ़ना चाहिए। आपने प्रवचन के समापन में स्वरचित कविता सुनाई कविता का शीर्षक है “तुम रूठे हम हर बला से छूटे ।

 

 

मंच संचालक विकास कुमार जैन ने प्रवचन सभा में घोषणा की राघौगढ़ में चातुर्मास कर रहे मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज की पावन पिच्छिका का परिवर्तन समारोह जैन समाज राघौगढ़ द्वारा आगामी 1 नवंबर रविवार को आचार्य विद्यासागर सभागार राघौगढ़ में आयोजित किया जा रहा है।

आगामी 2 नवंबर 26 सोमवार को मुनि श्रमण सागर जी महाराज का 12 वां दीक्षा दिवस अनेकों धार्मिक कार्यक्रमों के साथ आयोजित किया जा रहा है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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